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महामारी या आपदा में सरकार घटा सकेगी EPF योगदान, जानिए सैलरी और पेंशन पर असर

नए इमरजेंसी प्रावधान के तहत सरकार अधिकतम 3 महीने तक PF योगदान घटा या स्थगित कर सकेगी; सामान्य दिनों में 12% योगदान का नियम जारी रहेगा

कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF से जुड़े नियमों में आपातकालीन परिस्थितियों को लेकर नया प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत महामारी, एंडेमिक या राष्ट्रीय आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार कर्मचारियों और नियोक्ताओं के PF योगदान को सीमित अवधि के लिए घटाने या स्थगित करने का फैसला ले सकती है।

यह प्रावधान सामान्य परिस्थितियों में PF कटौती को अपने आप कम नहीं करता। इसके लिए सरकार को अलग से आदेश या अधिसूचना जारी करनी होगी।

3 महीने तक लागू हो सकता है प्रावधान

आपातकालीन स्थिति में सरकार PF योगदान में बदलाव का फैसला अधिकतम तीन महीने की अवधि के लिए कर सकती है। यह व्यवस्था पूरे देश या किसी विशेष राज्य अथवा क्षेत्र में लागू की जा सकती है।

सामान्य परिस्थितियों में पात्र कर्मचारियों के लिए निर्धारित PF योगदान का नियम जारी रहेगा। इसलिए केवल नया प्रावधान जुड़ने से हर कर्मचारी की मासिक PF कटौती अपने आप कम नहीं होगी।

PF योगदान घटने पर इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है

यदि सरकार किसी आपदा के दौरान कर्मचारी के अनिवार्य PF योगदान की दर कम करती है, तो कर्मचारी की टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की मासिक PF कटौती ₹6,000 है और इसे घटाकर ₹5,000 कर दिया जाता है, तो कर्मचारी को हर महीने ₹1,000 अतिरिक्त इन-हैंड सैलरी मिल सकती है।

तीन महीने में यह अतिरिक्त राशि ₹3,000 हो सकती है।

हालांकि, PF में कम राशि जमा होने का मतलब यह भी है कि उस अवधि में रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाली रकम कम हो सकती है।

PF खाते पर क्या असर पड़ेगा?

PF योगदान कम होने पर संबंधित अवधि में कर्मचारी के खाते में कम राशि जमा होगी। इससे भविष्य में मिलने वाले ब्याज और रिटायरमेंट कॉर्पस पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, यदि योगदान को केवल स्थगित किया जाता है, तो इसका प्रभाव अलग होगा। स्थगन का अर्थ भुगतान को कुछ समय के लिए टालना है, जबकि कटौती का अर्थ निर्धारित अवधि के लिए योगदान की राशि या दर कम करना हो सकता है। वास्तविक व्यवस्था सरकार की अधिसूचना में स्पष्ट होगी।

क्या कर्मचारी खुद PF कटौती कम कर सकता है?

नहीं। सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी या नियोक्ता अपनी मर्जी से वैधानिक PF योगदान की दर में बदलाव नहीं कर सकते। आपातकालीन प्रावधान का इस्तेमाल सरकार द्वारा निर्धारित असाधारण परिस्थितियों में जारी आदेश के अनुसार ही होगा।

VPF वालों पर क्या असर होगा?

जो कर्मचारी Voluntary Provident Fund (VPF) के जरिए अनिवार्य योगदान से अधिक राशि PF में जमा करते हैं, उनके अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान का नियम अलग है।

इसलिए किसी आपातकालीन आदेश में VPF पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित सरकारी अधिसूचना की शर्तों पर निर्भर करेगा।

2020 में भी घटाया गया था PF योगदान

कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2020 में PF योगदान की दर को कुछ समय के लिए 12% से घटाकर 10% किया गया था। इसका उद्देश्य उस समय कर्मचारियों और नियोक्ताओं के पास अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराना था।

नए प्रावधान में ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों के लिए एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

कर्मचारी को क्या समझना चाहिए?

PF से जुड़ा यह प्रावधान आपातकालीन स्थिति के लिए है, सामान्य महीनों के लिए नहीं। जब तक सरकार विशेष आदेश जारी नहीं करती, तब तक मौजूदा वैधानिक नियमों के अनुसार PF योगदान जारी रहेगा।

अगर भविष्य में सरकार योगदान घटाने का फैसला करती है, तो कर्मचारी को एक तरफ तत्काल अधिक टेक-होम सैलरी मिल सकती है, जबकि दूसरी तरफ उस अवधि में PF खाते में कम राशि जमा होने से रिटायरमेंट बचत प्रभावित हो सकती है।

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