TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक: दोनों गुटों को नए नाम-सिंबल चुनने होंगे, बंगाल उपचुनाव से पहले EC का अंतरिम फैसला
TMC नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज: दोनों गुटों को नए नाम-सिंबल चुनने होंगे

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल एवं घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने को कहा है।
यह आदेश फिलहाल अंतरिम है। यानी आयोग ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि TMC के मूल नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार किस गुट का होगा।
दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन विकल्प
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को तीन संभावित पार्टी नाम और तीन फ्री चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में देने को कहा था। आयोग उपलब्ध विकल्पों में से प्रत्येक गुट के लिए नाम और चिह्न आवंटित करेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य आगामी उपचुनाव में दोनों पक्षों की अलग चुनावी पहचान तय करना है, जबकि मूल TMC की पहचान को लेकर विवाद पर आयोग आगे विचार करेगा।
6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। दोनों सीटों को लेकर दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने यहां से जीत दर्ज की थी और बाद में दूसरी सीट रखने के कारण नंदीग्राम सीट छोड़ दी।
TMC की पहचान को लेकर विवाद कैसे बढ़ा?
2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर विवाद सामने आया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह ने पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नेतृत्व पर अपना दावा पेश किया, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट खुद को TMC की आधिकारिक राजनीतिक इकाई मानता रहा।
दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा पेश किया। आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल दोनों को मूल नाम और प्रतीक के इस्तेमाल से रोक दिया है।
EVM पर पहली बार अलग पहचान के साथ उतरेंगे गुट
चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश का सीधा असर आगामी उपचुनावों पर पड़ेगा। दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।
रिपोर्टों के मुताबिक आयोग का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में TMC के गठन के बाद पहली बार पार्टी के पारंपरिक नाम और ‘फूल एवं घास’ वाले चिह्न का इस्तेमाल इन उपचुनावों में दोनों पक्ष नहीं कर सकेंगे।
नंदीग्राम क्यों महत्वपूर्ण है?
नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण सीट रही है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने राज्य की राजनीति में ममता बनर्जी और TMC को प्रमुख स्थान दिलाने में भूमिका निभाई थी।
2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी से हार मिली थी। 2026 में भी अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत दर्ज की, लेकिन बाद में सीट छोड़ने के कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
आयोग का अंतिम फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम व्यवस्था है। इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग ने यह तय कर दिया है कि कौन-सा गुट TMC का वास्तविक या आधिकारिक उत्तराधिकारी है।
पार्टी के नाम, संगठन और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार को लेकर आयोग की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। तब तक दोनों गुट अलग चुनावी पहचान के साथ उपचुनाव लड़ेंगे।
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