कन्या संक्रांति 17 सितंबर को: सूर्य करेंगे कन्या राशि में प्रवेश, गंगाजल और काले तिल से स्नान की मान्यता; करें अन्न-वस्त्र का दान
सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर करें अर्घ्य और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान; घर पर गंगाजल और काले तिल से स्नान की धार्मिक मान्यता

17 सितंबर 2026, गुरुवार को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहा जाता है। हिंदू परंपरा में संक्रांति के दिन स्नान, सूर्य पूजा, दान-पुण्य और पितरों से जुड़े धार्मिक कार्य करने का विशेष महत्व माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। सूर्य वर्ष में 12 बार राशि परिवर्तन करते हैं, इसलिए एक वर्ष में 12 संक्रांतियां आती हैं।
संक्रांति पर जरूरतमंदों को करें दान
कन्या संक्रांति पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, कपड़े, जूते-चप्पल, छाता और आवश्यक वस्तुओं का दान किया जा सकता है।
दान करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि दी जा रही वस्तु वास्तव में जरूरतमंद व्यक्ति के उपयोग में आए।
इस दिन गौशाला में हरा चारा, अनाज या धन का दान करने की परंपरा भी है।
घर पर ऐसे करें स्नान
हर व्यक्ति के लिए गंगा, यमुना, नर्मदा या अन्य पवित्र नदियों तक जाकर स्नान करना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में धार्मिक मान्यता के अनुसार घर पर स्नान करते समय पानी में थोड़ा गंगाजल और काले तिल मिलाए जा सकते हैं।
स्नान के दौरान पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करने की परंपरा है। यह धार्मिक आस्था और मान्यता का विषय है।
सूर्य देव को इस तरह दें अर्घ्य
कन्या संक्रांति के दिन सुबह स्नान करके सूर्य देव की पूजा की जा सकती है।
तांबे के लोटे में पानी लेकर उसमें लाल फूल और थोड़े चावल डालें। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य दें।
अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गुड़ और तांबे के बर्तन का दान भी शुभ माना जाता है।
बारिश या बादलों के कारण सूर्य दिखाई न दें तो?
सितंबर में कई जगह बारिश और बादल रहने की संभावना होती है। यदि सुबह सूर्य दिखाई न दें, तो धार्मिक परंपरा के अनुसार पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव का ध्यान करते हुए अर्घ्य दिया जा सकता है।
पौधारोपण भी कर सकते हैं
कन्या संक्रांति के अवसर पर पौधारोपण करने को भी शुभ माना जाता है। सार्वजनिक स्थान पर छायादार पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल की जिम्मेदारी लेना अधिक महत्वपूर्ण है।
धार्मिक मान्यताओं में पीपल को पितरों से जोड़ा जाता है। भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के भक्त तुलसी का पौधा लगा सकते हैं, जबकि शिव भक्त बेल का पौधा लगा सकते हैं।
संक्रांति पर क्या करें?
- सुबह स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
- जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करें।
- गौशाला में चारा या अनाज दान करें।
- गुड़ और तांबे के बर्तन का दान कर सकते हैं।
- अपनी क्षमता के अनुसार पौधारोपण करें और उसकी देखभाल करें।
- पितरों और इष्ट देव का स्मरण करें।
नोट: पूजा, दान और स्नान से जुड़े फल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।
हमारे मठ | RNI NO. HARHIN/2023/90591



