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धर्म

आज हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी: पति-पत्नी साथ करें शिव-पार्वती की पूजा, सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखा जाता है तीज व्रत

आज 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ हरतालिका तीज व्रत का संयोग; पति-पत्नी मिलकर करें शिव-पार्वती की पूजा, जानें पूजा विधि और पौराणिक मान्यता

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का विशेष संयोग आज 14 सितंबर को बन रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की घट-बढ़ के कारण कुछ जगहों पर हरतालिका तीज का व्रत 13 सितंबर को भी रखा गया। हालांकि, अधिकतर पंचांगों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ हरतालिका तीज मनाने की सलाह दी गई है।

आज गणेश चतुर्थी भी है, इसलिए घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। ज्योतिषियों के मुताबिक, तृतीया देवी पार्वती की तिथि है, जबकि चतुर्थी के स्वामी भगवान गणेश हैं। ऐसे में दोनों व्रतों का एक ही दिन होना शुभ संयोग माना गया है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, जिस दिन द्वितीया और तृतीया का संयोग होता है, उस दिन तीज व्रत का विशेष महत्व नहीं माना जाता। इसी वजह से 14 सितंबर को तीज व्रत करना अधिक शुभ बताया गया है।

सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से किया जाता है तीज व्रत

हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से रखती हैं। मान्यता के अनुसार, सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पत्नी के साथ पति को भी शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए।

पति-पत्नी जब साथ मिलकर शिव-पार्वती की पूजा करते हैं तो आपसी प्रेम, सम्मान और तालमेल बढ़ने की मान्यता है। पूजा की कई विधियां ऐसी हैं, जिन्हें पति-पत्नी साथ मिलकर करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और सकारात्मकता बनी रहती है।

गणेश पूजन के बाद करें शिव-पार्वती की पूजा

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के संयोग में पहले गणेश जी की पूजा और इसके बाद शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा बताई गई है।

  • भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और मोदक का भोग लगाएं।
  • धूप-दीप जलाकर भगवान गणेश की आरती करें।
  • गणेश पूजन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करें।
  • इसके बाद शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें।
  • हरतालिका तीज व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य करती हैं।
  • व्रत करने वाली महिलाओं को शिव-पार्वती से जुड़ी कथाएं पढ़ने या सुनने की परंपरा है।
  • पूजा के बाद पति-पत्नी किसी जरूरतमंद महिला को सुहाग की सामग्री जैसे लाल साड़ी, लाल चूड़ियां, कुमकुम और बिंदी दान कर सकते हैं।

माता पार्वती ने सबसे पहले किया था हरतालिका तीज व्रत

हरतालिका तीज को लेकर पौराणिक मान्यता है कि सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत किया था। तृतीया तिथि की स्वामी देवी पार्वती मानी जाती हैं।

मान्यता के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं। अपनी इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने कठोर तप किया। माता पार्वती के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वर दिया। इसके बाद शिव और पार्वती का विवाह हुआ।

इसी मान्यता के कारण हरतालिका तीज को महिलाओं के लिए विशेष महत्व वाला व्रत माना जाता है।

तीज पर पांच पहर पूजा की परंपरा

हरतालिका तीज पर पांच पहर यानी दिनभर में पांच बार पूजा-अर्चना करने की परंपरा बताई गई है। इसके अगले दिन सुबह बालू-रेत से बनाए गए शिव, पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है।

पूजा के बाद इन प्रतिमाओं का नदी, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत में विसर्जन किया जाता है। इसके बाद दान-पुण्य करके महिलाएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं।

शिव-पार्वती मंदिर में करें दर्शन और पूजन

हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती के मंदिर में दर्शन-पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं और भगवान शिव को बिल्व पत्र चढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाने, हार-फूल से श्रृंगार करने, धूप-दीप जलाकर आरती करने और मिठाई का भोग लगाने की परंपरा है।

ध्यान दें: व्रत और पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार अलग हो सकती है। ऊपर दी गई जानकारी आपकी उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर है।

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