निकाय चुनाव पर गहलोत का भाजपा पर हमला: सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप, डोटासरा और जूली ने भी उठाए सवाल
पूर्व CM ने पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग और पार्षदों पर दबाव के लगाए आरोप; डोटासरा ने लोकतांत्रिक परंपराओं पर प्रहार बताया, जूली ने तिजारा का मामला उठाया

जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर चुनाव प्रक्रिया में सरकारी मशीनरी और पुलिस-प्रशासन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलग-अलग बयानों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
गहलोत बोले- नियम-कायदे ताक पर रखे गए
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि निकाय चुनावों में भाजपा सरकार ने सत्ता और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर अपने बोर्ड बनाने की कोशिश की।
गहलोत ने दावा किया कि कई जगह पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर कांग्रेस तथा कांग्रेस समर्थित पार्षदों पर दबाव बनाया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि समय आने पर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
पार्षदों पर दबाव और पैसों के आरोप
गहलोत ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों के लिए 2 करोड़ रुपए तक की बोली लगाए जाने की चर्चा हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ कांग्रेस पार्षदों को उनके मकान या प्रतिष्ठानों को लेकर नोटिस दिए गए और कार्रवाई का दबाव बनाया गया।
उन्होंने निकाय चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया और इसे भाजपा सरकार के लिए झटका बताया।
दूसरे राज्यों की पुलिस के इस्तेमाल का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस के जरिए भी राजस्थान के निर्वाचित पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
उन्होंने मथानिया, पावटा, तिजारा, कुचेरा, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, अलवर और निंबाहेड़ा सहित कई स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां सामने आए घटनाक्रमों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
गहलोत ने यह आशंका भी जताई कि आगामी पंचायत चुनावों में सरकारी तंत्र के इस्तेमाल की स्थिति और बढ़ सकती है।
डोटासरा बोले- यह लोकतांत्रिक परंपराओं पर प्रहार
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने उम्मीदवारों को समर्थन दिलाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, विधायकों और पूर्व विधायकों के साथ पुलिस कार्रवाई और कथित अभद्रता की गई। डोटासरा के मुताबिक, कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षदों पर भी दबाव बनाने के प्रयास हुए।
डोटासरा ने इसे प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का गंभीर अध्याय बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्षदों पर पुराने मामलों में कार्रवाई और नोटिस देने के आरोप सामने आए हैं।
जूली बोले- तिजारा में पार्षदों को रोका गया
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि तिजारा के 18 पार्षदों को हरियाणा बॉर्डर पर रोका गया।
जूली ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग को शिकायत भेजी गई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक दबाव ही इस्तेमाल होना था तो चुनाव कराने की जरूरत क्या थी।
उन्होंने कहा कि जनमत को प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए दबाया नहीं जा सकता।
भाजपा नेताओं ने आरोपों को खारिज किया
निकाय चुनाव के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के इन आरोपों का खंडन किया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि मेयर और अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्षद गुप्त मतदान करते हैं और किसी पार्षद का वोट जबरन किसी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं डलवाया जा सकता।
भाजपा की ओर से निकाय चुनाव में बड़ी संख्या में बोर्ड बनाने को संगठन और चुनावी रणनीति की सफलता बताया गया है।
चुनाव परिणाम के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज
निकाय चुनाव के परिणाम और मेयर-सभापति चुनाव के बाद राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां चुनाव प्रक्रिया और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने चुनावी प्रदर्शन को संगठनात्मक रणनीति और जनसमर्थन का परिणाम बता रही है।
इन आरोपों और उनके जवाबों के बीच चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मामलों पर अदालतों और संबंधित संस्थाओं में हुई कार्यवाही अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर देखी जाएगी।




