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मध्य प्रदेश

MP में 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर मकान बनाना आसान: 90 के बजाय 30 दिन में पास होगा नक्शा, T&CP की मंजूरी खत्म

500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर T&CP की अलग मंजूरी नहीं, स्थानीय निकाय 30 दिन में पास करेगा नक्शा; इंदौर समेत प्रदेश में हजारों लोगों को राहत की उम्मीद

भोपाल। मध्य प्रदेश में 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मकान बनाना अब आसान हो जाएगा। ऐसे प्लॉट पर भवन निर्माण के लिए अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) से अलग डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी।

यदि प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत है, तो संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद ही नक्शा मंजूर कर भवन निर्माण की अनुमति दे सकेगा। नई व्यवस्था में नक्शा 30 दिन के भीतर मंजूर किया जा सकेगा। पहले इस प्रक्रिया में 90 दिन या उससे अधिक समय लगने के साथ तीन से चार महीने तक का समय लग जाता था।

सरकार ने नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट 28 अगस्त को जारी कर पांच दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। अब इसका फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जा रहा है।

नए नियमों में 5 बड़े बदलाव

1. 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर लागू होगी छूट

नई व्यवस्था का लाभ केवल 500 वर्गमीटर (करीब 5,382 वर्गफीट) तक के प्लॉट पर मिलेगा। इससे बड़े भूखंडों पर पहले की तरह संबंधित नियम और मंजूरी प्रक्रिया लागू रहेगी।

2. T&CP से डेवलपमेंट परमिशन की जरूरत नहीं

500 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर मकान बनाने के लिए अब T&CP से अलग से डेवलपमेंट परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे भवन निर्माण की मंजूरी की प्रक्रिया कम हो जाएगी।

3. स्थानीय निकाय को मिलेगा नक्शा पास करने का अधिकार

नक्शा मंजूर करने और भवन निर्माण की अनुमति देने का अधिकार संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के पास रहेगा। यानी आवेदक को भवन अनुमति के लिए स्थानीय निकाय के स्तर पर ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

4. लैंड यूज होना जरूरी

छूट का लाभ तभी मिलेगा जब प्लॉट का लैंड यूज स्वीकृत डेवलपमेंट प्लान यानी मास्टर प्लान के अनुरूप हो। यदि जमीन का उपयोग आवासीय निर्माण के लिए स्वीकृत नहीं है, तो केवल प्लॉट का आकार 500 वर्गमीटर से कम होने से यह सुविधा नहीं मिलेगी।

5. 30 दिन में नक्शा मंजूर करने की व्यवस्था

नई प्रक्रिया के तहत स्थानीय निकाय को नक्शा मंजूर करने की प्रक्रिया 30 दिन में पूरी करनी होगी। इससे लोगों को महीनों तक फाइल अटके रहने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

उदाहरण से समझें, कैसे बदलेगी प्रक्रिया?

केस 1: 1,000 वर्गफीट का प्लॉट

पहले:
नगर निगम में आवेदन करने के बाद डेवलपमेंट परमिशन और लेआउट अप्रूवल के लिए T&CP की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसके चलते फाइल लंबे समय तक अटकी रहती थी।

अब:
यदि 1,000 वर्गफीट के प्लॉट का लैंड यूज पहले से आवासीय है, तो सीधे नगर निगम में भवन निर्माण के लिए आवेदन किया जा सकेगा। नियमों के अनुरूप होने पर नक्शा 30 दिन में मंजूर किया जा सकेगा।

केस 2: 3,000 या 5,000 वर्गफीट का प्लॉट

पहले:
3,000 वर्गफीट (करीब 279 वर्गमीटर) या 5,000 वर्गफीट (करीब 465 वर्गमीटर) के प्लॉट पर पुराने मकान को तोड़कर नया या बहुमंजिला मकान बनाने के लिए T&CP से साइट क्लियरेंस और लेआउट की मंजूरी लेनी पड़ती थी।

अब:
दोनों प्लॉट 500 वर्गमीटर की निर्धारित सीमा में आते हैं। यदि निर्माण मास्टर प्लान के नियमों के अनुरूप है, तो स्थानीय निकाय से ही भवन निर्माण की अनुमति ली जा सकेगी।

इंदौर में 3 साल से अटकी भवन अनुमति की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद

नियमों में बदलाव के पीछे इंदौर में लंबे समय से अटकी भवन अनुमतियों की समस्या भी एक वजह बताई जा रही है। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह मुद्दा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने उठाया था।

इंदौर के बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड और परदेशीपुरा सहित एक दर्जन से ज्यादा इलाकों में खसरा भूमि और प्लॉटों के लेआउट T&CP से स्वीकृत नहीं थे।

इन इलाकों में पहले ‘डाटा फॉर्म’ के आधार पर प्लॉट तैयार कर भवन निर्माण की अनुमति दी जाती थी। जुलाई 2023 में इस व्यवस्था पर रोक लगने के बाद मकानों के नक्शे पास होने की प्रक्रिया रुक गई थी।

इंदौर समेत प्रदेश के लोगों को राहत की उम्मीद

नई व्यवस्था लागू होने के बाद इंदौर सहित प्रदेश के उन इलाकों में भवन अनुमति की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की उम्मीद है, जहां 500 वर्गमीटर तक के प्लॉट होने के बावजूद T&CP की मंजूरी के कारण निर्माण की अनुमति अटकी हुई थी।

सरकार का उद्देश्य भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना और लोगों को अलग-अलग विभागों की मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करने से राहत देना है।

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