मध्य प्रदेश

आवारा कुत्तों की समस्या पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

छह महीने में 15 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का सरकार ने दिया ब्योरा; 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई, रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी

जबलपुर, 29 सितंबर। मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उनसे जुड़ी घटनाओं को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा के इंतजामों की जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में दर्ज स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। सरकार ने अदालत को बताया कि पिछले छह महीनों में प्रदेश में 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ अब 3 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे सरकार की रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। इसके बाद हाईकोर्ट अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजेगा। मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 17 नवंबर को प्रस्तावित है।

सरकार के कदमों को अदालत मित्र ने बताया संतोषजनक

सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को संतोषजनक बताया। इस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि 3 नवंबर को रिपोर्ट पर अंतिम सुनवाई की जाएगी। इसके बाद आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई जनहित याचिका

आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को कई निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 19 मई 2026 को शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’ शीर्षक से दर्ज होने वाली जनहित याचिका की लगातार निगरानी करने को कहा था, ताकि समस्या का ठोस समाधान निकाला जा सके।

इसी के तहत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की। अदालत ने राज्य सरकार से आवारा कुत्तों की रोकथाम, उनकी नसबंदी, टीकाकरण और सार्वजनिक परिसरों में लोगों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा था।

छह महीने में 15 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण

राज्य के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की ओर से हाईकोर्ट में पेश जवाब में सरकार ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, पिछले छह महीनों में प्रदेश में 15 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है।

सरकार ने अपने जवाब में सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा और आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी विवरण दिया है।

कचरा प्रबंधन और भोजन देने पर भी ध्यान

सरकार ने अदालत को बताया कि खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों को कचरे का उचित निपटान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्हें खाद्य अपशिष्ट बंद डस्टबिन में रखने और खान-पान के स्टॉल के आसपास आवारा कुत्तों को भोजन नहीं कराने की सलाह दी जा रही है।

सरकार का कहना है कि कचरे के उचित प्रबंधन और खाद्य अपशिष्ट को खुले में न छोड़ने के लिए भी जागरूकता संबंधी प्रयास किए जा रहे हैं।

3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट की खंडपीठ 3 नवंबर को सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट और अब तक उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी। अदालत इसके बाद आवश्यक निर्देश जारी करेगी। हाईकोर्ट की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी, जहां 17 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई प्रस्तावित है।

 

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