जगदलपुर में बाढ़ से तबाही, इंद्रावती नदी ने तोड़ा 50 साल का रिकॉर्ड: 833 लोगों का रेस्क्यू, 65 राहत शिविरों में 8,894 लोग
इंद्रावती का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंचा, निचले इलाकों में घुसा पानी; बोड़ना और भेजापदर गांवों का सड़क संपर्क टूटा, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर 50 साल के पुराने रिकॉर्ड को पार कर 12.39 मीटर तक पहुंच गया। इससे जगदलपुर और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में कई इलाके पानी से घिरे नजर आए। बाढ़ के कारण खेत जलमग्न हो गए और कई घरों में भी पानी घुस गया।
9 जुलाई 1973 को इंद्रावती नदी का जलस्तर 12.18 मीटर दर्ज किया गया था। इस बार नदी का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड से 21 सेंटीमीटर अधिक हो गया। बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीं, जिले में 65 राहत शिविरों में 8,894 लोगों को ठहराया गया है।
इंद्रावती का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंचा
लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी की आवक के कारण इंद्रावती नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर 12.39 मीटर तक पहुंच गया, जबकि इसका खतरे का निशान 8.3 मीटर है। जलस्तर में इस बढ़ोतरी के कारण तटीय और निचले इलाकों में बाढ़ का असर देखने को मिला।
बोड़ना और भेजापदर जैसे गांव पानी से घिर गए, जिससे उनका सड़क संपर्क टूट गया। जगदलपुर शहर के कई निचले इलाकों में भी पानी भर गया। खेतों के जलमग्न होने के साथ कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन पुल के पिलर तक पानी पहुंच गया।
आज भी 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक बढ़ सकता है जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग, हैदराबाद की एडवाइजरी के बाद जिला प्रशासन ने दोबारा अलर्ट जारी किया है। आयोग के मुताबिक, ओडिशा के नवरंगपुर क्षेत्र में इंद्रावती नदी के ऊपरी हिस्से में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर जगदलपुर में भी पड़ सकता है।
एडवाइजरी के अनुसार, 29 सितंबर को जगदलपुर में नदी का जलस्तर 60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक और बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसके मद्देनजर कलेक्टर आकाश छिकारा ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में जाने की अपील की है। अधिकारियों और आपदा प्रबंधन की टीमों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू अभियान चलाया। एक दिन में कुल 833 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें से 821 लोगों को नावों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि डोंगाघाट में फंसे 12 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट किया गया।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
65 राहत शिविरों में 8,894 लोगों के रहने की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जिले में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें 8,894 लोगों को ठहराया गया है।
- शहरी क्षेत्र: 8 राहत शिविरों में 2,620 लोग।
- ग्रामीण क्षेत्र: 57 राहत शिविरों में 6,274 लोग।
प्रशासन के मुताबिक, राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
जिला प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जोखिम न उठाएं। बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग तत्काल राहत शिविरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष या संबंधित राजस्व अधिकारी को सूचना देने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




