दिल्ली NCR

CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, SIR के 14 फैसलों पर चुनाव आयोग से मांगा जवाब

कोर्ट ने कहा- कानून का उल्लंघन मिला तो फैसलों पर रोक लगा सकते हैं; बिना रिकॉर्ड देखे यह नहीं मान सकते कि फैसले अकेले लिए गए

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर निलंबित करने या उनके पद पर काम करने से रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने SIR से जुड़े करीब 14 फैसलों को लेकर लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन फैसलों को अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और जवाब देखने के बाद यदि यह सामने आता है कि फैसले कानून के अनुरूप नहीं लिए गए थे, तो अदालत उचित कार्रवाई कर सकती है।

कोर्ट ने कहा- पहले रिकॉर्ड सामने आने दें

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि फिलहाल केवल आरोपों के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि सभी फैसले अकेले लिए गए थे।

अदालत ने चुनाव आयोग से स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मांगा है। कोर्ट के अनुसार, यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि किसी फैसले के लिए जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले पर रोक लगाने या उसे कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित करने पर विचार किया जा सकता है।

CEC को सस्पेंड करने की मांग

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CEC को अंतरिम तौर पर निलंबित करने या उन्हें काम करने से रोकने की मांग की।

उन्होंने 2023 के कानून में CEC और चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया और कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर CEC को हटाने या निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- फिर चुनाव कौन कराएगा?

सुनवाई के दौरान जब CEC को काम करने से रोकने की मांग की गई तो जस्टिस बागची ने सवाल किया कि ऐसी स्थिति में चुनाव कौन कराएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से जवाब दिया गया कि बाकी दो चुनाव आयुक्त चुनाव प्रक्रिया संभाल सकते हैं। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता और निष्पक्षता का भी मुद्दा उठाया।

SIR के 14 फैसलों पर विवाद

याचिका में SIR से जुड़े करीब 14 फैसलों का रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई।

अदालत ने पूछा कि क्या दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फैसलों पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनका यही दावा है और रिकॉर्ड देखने से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

कोर्ट ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

क्या सुप्रीम कोर्ट CEC को सस्पेंड कर सकता है?

सुनवाई के दौरान CEC को निलंबित करने की मांग के साथ संवैधानिक अधिकारों का सवाल भी उठा। अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी देता है।

अदालत किसी चुनाव आयोग के फैसले की न्यायिक समीक्षा कर सकती है और यदि कोई फैसला कानून या संविधान के विपरीत पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित न्यायिक आदेश पारित कर सकती है। हालांकि, CEC को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया अलग है।

विवाद की शुरुआत मीडिया रिपोर्ट से

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद तब बढ़ा जब एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर कथित मतभेदों का दावा किया गया।

रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जताए जाने का उल्लेख किया गया था। इन्हीं दावों के आधार पर बाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

विपक्ष की महाभियोग की मांग का भी जिक्र

मामले में CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की संभावित कोशिश का भी जिक्र सामने आया है। अप्रैल 2026 में भी विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिए जाने की बात सामने आई थी।

हालांकि, CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया संसद से जुड़ी है और इसके लिए संविधान में निर्धारित विशेष प्रक्रिया का पालन करना होता है।

अब चुनाव आयोग के जवाब पर नजर

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया है। अदालत अब चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब तथा रिकॉर्ड के आधार पर यह देखेगी कि SIR से जुड़े फैसलों में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।

यदि रिकॉर्ड में प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है तो अदालत संबंधित फैसलों पर उचित आदेश दे सकती है।

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