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कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर जेसन अर्डे का 41 की उम्र में निधन

घर में बेहोश मिले प्रोफेसर अर्डे; मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा, रिसर्च में नकल के आरोपों और नियुक्ति को लेकर उठे थे सवाल

लंदन। इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें शुक्रवार दोपहर दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोशी की हालत में पाया गया। मौके पर पहुंची एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पुलिस के अनुसार उनकी मौत अचानक हुई और फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे इसे संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच की जा रही है। अर्डे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर शोध और अध्यापन के लिए जाने जाते थे। उनकी मौत से कुछ दिन पहले ही उन्होंने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और संस्थान में उनके कामकाज को लेकर जांच शुरू की थी, जिसमें यह भी देखा जा रहा था कि उन्हें 2022 में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया कैसी रही और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफे के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर गहरा असर पड़ा था। उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगाए गए थे कि दूसरे लोगों के काम को उचित श्रेय दिए बिना इस्तेमाल किया गया। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। उनकी नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था और कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की DEI यानी डायवर्सिटी, इक्विटी एंड इंक्लूजन नीति के तहत प्राथमिकता मिली। हालांकि, उनके समर्थकों ने इन आरोपों का विरोध किया और कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया। ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव करते हुए उनके खिलाफ कथित नस्लवादी अभियान की आलोचना की थी। अर्डे के परिवार ने भी कहा कि उनके बारे में फैलाई गई गलत जानकारियों के अभियान ने उन्हें काफी परेशान किया था। परिवार ने मीडिया से अपील की कि इस कठिन समय में उन्हें निजता दी जाए और जेसन तथा उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे कथित उत्पीड़न को रोका जाए। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस और ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। अर्डे के निधन के बाद उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, रिसर्च से जुड़े विवादों और DEI नीतियों को लेकर ब्रिटेन में चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

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