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आतिशबाजी मार्केट के लिए 13 सालों से मशक्कत, शिवबाड़ी में योजना बनी, व्यवसायियों से रकम ली पर दुकानें नहीं दीं बीकानेर18 घंटे पहले बीकानेर में पिछले 13 सालों से आतिशबाजी मार्केट बनाने की मशक्कत की जा रही है, लेकिन व्यवसायियों से रकम लेने के बाद भी प्रशासन को इसमें कामयाबी नहीं मिली है। प्रशासन ने शिवबाड़ी में 90 भूखंड तय किए गए थे, लेकिन कोर्ट स्टे के कारण जगह पिछले साल जगह बदलकर घड़सीसर के भोजनशाला में दुकानें देना तय किया गया और दीवाली जाने के बाद उसे भूला दिया। जिले में पटाखों के करीब 40 स्थाई लाइसेंसधारी हैं जिनमें से 30 शहरी क्षेत्र के हैं। इसके अलावा हर साल 500 से ज्यादा अस्थाई दुकानों के लिए आवेदन किए जाते हैं जिनमें से स्क्रूटनिंग कर लगभग 400 को अस्थाई लाइसेंस जारी किया जाता है। इनमें से ज्यादातर शहरी क्षेत्र के संकरे इलाकों में दुकानें लगाते हैं जिससे सुरक्षा का सवाल खड़ा होता है। आगजनी की घटनाओं और सुरक्षा को देखते हुए अलग आतिश मार्केट बनाने की योजना बनी, लेकिन 13 सालों से मशक्कत करने के बाद भी प्रशासन को इसमें कामयाबी नहीं मिली है। वर्ष, 13 में शिवबाड़ी में मार्केट के लिए 90 भूखंड तय किए गए जिनमें से 38 व्यवसायियों ने निर्धारित राशि भी जमा करा दी थी। उसके बावजूद व्यवसायियों को कब्जा नहीं दिया गया। पिछले साल पटाखा व्यवसायियों ने जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और बीडीए आयुक्त अपर्णा गुप्ता से वार्ता की तो सामने आया कि शिवबाड़ी में तय की गई जमीन पर कोर्ट का स्टे है और प्रशासन ने घड़सीसर में भोजनशाला की जमीन पर आतिश मार्केट बनाना तय किया। लेकिन, दीवाली जाने के बाद उसे भूला दिया गया। अब पटाखा व्यवसायी एक बार फिर एकजुट होकर आतिश मार्केट के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से स्वीकृति लेनी की तैयारी में जुटे हैं। वर्ष, 13 में दो साइज की दुकानों की ली गई थी रकम वर्ष, 13 में शिवबाड़ी में आतिशबाजी मार्केट की योजना बनी और यूआईटी ने वहां 10 बाई 10 और 10 बाई 20 साइज की दुकानों के लिए 90 भूखंड तय कर दिए। छोटे साइज के 50,000 रु. और बड़े साइज के एक लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई। इन भूखंडों के लिए 38 पटाखा व्यवसायियों ने राशि भी जमा करा दी, लेकिन आज तक पटाखा व्यवसायियों को भूखंड आबंटित नहीं किए जा सके। कोर्ट स्टे के कारण शिवबाड़ी योजना पर ही पानी फिर गया और पिछले साल बीडीए को जिम्मा सौंपा गया। जोड़बीड़, घड़सीसर पुल से जोधपुर बाइपास की ओर जाने वाली रोड चिह्नित की गई है, लेकिन दीवाली जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी उसे भूल गए।

बीकानेर में 13 साल से अटका आतिशबाजी मार्केट; शिवबाड़ी में 90 भूखंड तय कर 38 कारोबारियों से 50 हजार से 1 लाख रुपए तक लिए गए, कोर्ट स्टे के बाद घड़सीसर की नई योजना भी अधूरी

बीकानेर में पिछले 13 सालों से आतिशबाजी मार्केट बनाने की मशक्कत की जा रही है, लेकिन व्यवसायियों से रकम लेने के बाद भी प्रशासन को इसमें कामयाबी नहीं मिली है। प्रशासन ने शिवबाड़ी में 90 भूखंड तय किए गए थे, लेकिन कोर्ट स्टे के कारण जगह पिछले साल जगह बदलकर घड़सीसर के भोजनशाला में दुकानें देना तय किया गया और दीवाली जाने के बाद उसे भूला दिया।

जिले में पटाखों के करीब 40 स्थाई लाइसेंसधारी हैं जिनमें से 30 शहरी क्षेत्र के हैं। इसके अलावा हर साल 500 से ज्यादा अस्थाई दुकानों के लिए आवेदन किए जाते हैं जिनमें से स्क्रूटनिंग कर लगभग 400 को अस्थाई लाइसेंस जारी किया जाता है। इनमें से ज्यादातर शहरी क्षेत्र के संकरे इलाकों में दुकानें लगाते हैं जिससे सुरक्षा का सवाल खड़ा होता है।

आगजनी की घटनाओं और सुरक्षा को देखते हुए अलग आतिश मार्केट बनाने की योजना बनी, लेकिन 13 सालों से मशक्कत करने के बाद भी प्रशासन को इसमें कामयाबी नहीं मिली है। वर्ष, 13 में शिवबाड़ी में मार्केट के लिए 90 भूखंड तय किए गए जिनमें से 38 व्यवसायियों ने निर्धारित राशि भी जमा करा दी थी। उसके बावजूद व्यवसायियों को कब्जा नहीं दिया गया। पिछले साल पटाखा व्यवसायियों ने जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और बीडीए आयुक्त अपर्णा गुप्ता से वार्ता की तो सामने आया कि शिवबाड़ी में तय की गई जमीन पर कोर्ट का स्टे है और प्रशासन ने घड़सीसर में भोजनशाला की जमीन पर आतिश मार्केट बनाना तय किया। लेकिन, दीवाली जाने के बाद उसे भूला दिया गया। अब पटाखा व्यवसायी एक बार फिर एकजुट होकर आतिश मार्केट के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से स्वीकृति लेनी की तैयारी में जुटे हैं।

वर्ष, 13 में दो साइज की दुकानों की ली गई थी रकम

वर्ष, 13 में शिवबाड़ी में आतिशबाजी मार्केट की योजना बनी और यूआईटी ने वहां 10 बाई 10 और 10 बाई 20 साइज की दुकानों के लिए 90 भूखंड तय कर दिए। छोटे साइज के 50,000 रु. और बड़े साइज के एक लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई। इन भूखंडों के लिए 38 पटाखा व्यवसायियों ने राशि भी जमा करा दी, लेकिन आज तक पटाखा व्यवसायियों को भूखंड आबंटित नहीं किए जा सके। कोर्ट स्टे के कारण शिवबाड़ी योजना पर ही पानी फिर गया और पिछले साल बीडीए को जिम्मा सौंपा गया। जोड़बीड़, घड़सीसर पुल से जोधपुर बाइपास की ओर जाने वाली रोड चिह्नित की गई है, लेकिन दीवाली जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी उसे भूल गए।

बीकानेर। शहर में आतिशबाजी के लिए अलग मार्केट बनाने की योजना पिछले करीब 13 वर्षों से लंबित है। प्रशासन ने शिवबाड़ी में 90 भूखंड निर्धारित किए थे और इनमें से 38 पटाखा कारोबारियों से निर्धारित राशि भी जमा कराई गई, लेकिन उन्हें अब तक भूखंडों का कब्जा नहीं मिल पाया।

शिवबाड़ी की जमीन पर कोर्ट स्टे आने के बाद पिछले साल प्रशासन ने घड़सीसर स्थित भोजनशाला की जमीन पर आतिशबाजी मार्केट विकसित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, दीपावली के बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

शहर में 400 से ज्यादा अस्थायी पटाखा दुकानें

बीकानेर जिले में करीब 40 स्थायी पटाखा लाइसेंसधारी हैं, जिनमें लगभग 30 शहरी क्षेत्र में हैं। इसके अलावा हर साल 500 से अधिक अस्थायी दुकानों के लिए आवेदन आते हैं। जांच के बाद करीब 400 दुकानदारों को अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाने की जानकारी है।

इनमें से बड़ी संख्या में दुकानें शहर के संकरे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगती हैं। इससे त्योहार के दौरान आगजनी और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। इसी वजह से अलग और व्यवस्थित आतिशबाजी मार्केट की जरूरत महसूस की गई थी।

2013 में 90 भूखंड तय किए गए थे

वर्ष 2013 में यूआईटी की ओर से शिवबाड़ी में आतिशबाजी मार्केट के लिए 90 भूखंड निर्धारित किए गए थे। इनमें 10×10 फीट और 10×20 फीट आकार के भूखंड शामिल थे।

छोटे भूखंड के लिए 50 हजार रुपए और बड़े भूखंड के लिए एक लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई थी। 38 पटाखा कारोबारियों ने निर्धारित राशि जमा भी करा दी, लेकिन भूखंडों का आवंटन और कब्जा नहीं हो सका।

कोर्ट स्टे के बाद घड़सीसर में नई योजना

शिवबाड़ी की जमीन पर कानूनी विवाद और कोर्ट स्टे के कारण योजना अटक गई। पिछले साल पटाखा कारोबारियों ने तत्कालीन जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि और बीडीए आयुक्त अपर्णा गुप्ता से मुलाकात की थी।

इसके बाद घड़सीसर में भोजनशाला की जमीन पर आतिशबाजी मार्केट विकसित करने की योजना सामने आई। जोड़बीड़-घड़सीसर पुल से जोधपुर बाइपास की ओर जाने वाली सड़क के आसपास की जमीन को इसके लिए चिह्नित किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन दीपावली के बाद इस दिशा में आगे काम नहीं हो सका।

अब पटाखा कारोबारी एक बार फिर संगठित होकर प्रशासन से आतिशबाजी मार्केट के लिए अनुमति और जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि स्थायी और सुरक्षित मार्केट बनने से शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में पटाखों की अस्थायी दुकानों से जुड़े सुरक्षा जोखिम को कम किया जा सकेगा।

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