APAAR ID की प्राइवेसी पॉलिसी बदली: अब नौकरी में भी काम आएगी ID, नियोक्ता कर सकेंगे डिग्री-मार्कशीट का सत्यापन
APAAR ID की प्राइवेसी पॉलिसी बदली: अब नौकरी में भी डिग्री-मार्कशीट का वेरिफिकेशन

छात्रों की APAAR ID (Automated Permanent Academic Account Registry) अब केवल पढ़ाई और शैक्षणिक रिकॉर्ड संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्रालय की ओर से APAAR पोर्टल की प्राइवेसी पॉलिसी 18 सितंबर 2026 को अपडेट की गई है। नई नीति में अधिकृत संस्थानों और नियोक्ताओं के जरिए अकादमिक रिकॉर्ड के सत्यापन का प्रावधान स्पष्ट किया गया है।
APAAR को सरकार के ‘One Nation, One Student ID’ कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है। इसमें छात्र के मार्कशीट, ग्रेडशीट, डिप्लोमा, डिग्री, सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकता है।
नौकरी के दौरान भी हो सकेगा अकादमिक रिकॉर्ड का सत्यापन
आधिकारिक APAAR जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थान और स्किल संस्थान छात्रों के अकादमिक रिकॉर्ड को एडमिशन और भर्ती (recruitment) के लिए एक्सेस और वेरिफाई कर सकते हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता का डिजिटल सत्यापन APAAR व्यवस्था के जरिए किया जा सकता है।
इससे नियोक्ता उम्मीदवार द्वारा दी गई डिग्री या अन्य शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता जांचने में मदद ले सकेंगे।
छात्र की सहमति से डेटा शेयरिंग
नई प्राइवेसी पॉलिसी में कहा गया है कि APAAR अकादमिक जानकारी को अधिकृत थर्ड पार्टी, जिसमें शैक्षणिक संस्थान और नियोक्ता शामिल हो सकते हैं, के साथ वेरिफिकेशन के उद्देश्य से साझा कर सकता है। नीति में उपयोगकर्ता की सहमति को भी महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि APAAR ID नंबर मिलते ही कोई नियोक्ता छात्र का पूरा अकादमिक रिकॉर्ड मनमाने तरीके से देख सकेगा। रिकॉर्ड साझा करने की प्रक्रिया अधिकृत पहुंच और निर्धारित वेरिफिकेशन व्यवस्था के तहत होगी।
APAAR में कौन-कौन से रिकॉर्ड रह सकते हैं?
APAAR में कई प्रकार के शैक्षणिक दस्तावेज और उपलब्धियां डिजिटल रूप में जुड़ सकती हैं, जैसे—
- मार्कशीट और ग्रेडशीट
- डिग्री और डिप्लोमा
- सर्टिफिकेट
- ट्रांसक्रिप्ट
- अकादमिक क्रेडिट
- अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां
- को-करीकुलर उपलब्धियां
APAAR, DigiLocker और Academic Bank of Credits (ABC) से भी जुड़ा हुआ है, जिससे छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनती है।
फर्जी डिग्री की जांच में मिल सकती है मदद
सरकारी APAAR पोर्टल के अनुसार, यह व्यवस्था शैक्षणिक रिकॉर्ड के सत्यापन को आसान बनाने और फर्जी दस्तावेजों से जुड़ी समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। नौकरी के आवेदन के दौरान उम्मीदवार की बताई गई शैक्षणिक योग्यता का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से प्रमाण-पत्रों की जांच अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकती है।
डेटा की सुरक्षा और क्लाउड स्टोरेज पर भी नीति स्पष्ट
नई प्राइवेसी पॉलिसी में APAAR ने बताया है कि वह डेटा की उपलब्धता, एक्सेस, अपटाइम, डिजास्टर रिकवरी और बिजनेस कंटिन्युटी के लिए थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत डेटा इन डेटा प्रोसेसरों को ट्रांसफर किया जा सकता है।
नीति में एन्क्रिप्शन और एक्सेस कंट्रोल जैसे सुरक्षा उपायों का भी उल्लेख किया गया है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
APAAR का इस्तेमाल करने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उनकी डिजिटल अकादमिक पहचान का उपयोग शिक्षा के साथ-साथ एडमिशन, क्रेडिट ट्रांसफर और नौकरी के लिए रिकॉर्ड वेरिफिकेशन में भी किया जा सकता है। आधिकारिक FAQ में भी भर्ती और अन्य प्रक्रियाओं के लिए अकादमिक इतिहास के सत्यापन का उल्लेख है।
हालांकि, डिजिटल रिकॉर्ड के विस्तार के साथ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे। छात्रों को अपने APAAR/DigiLocker अकाउंट की जानकारी और प्रमाणीकरण विवरण सुरक्षित रखने चाहिए।
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