
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह मामला सिर्फ ममता बनर्जी का नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों और मतदाताओं से जुड़ा मुद्दा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC के मामले में एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है। उनके मुताबिक, BJP और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियों को तोड़ते हैं और बाद में चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में विवाद को दोनों गुटों के दावे के आधार पर विचाराधीन बताया है।
चुनाव आयोग ने TMC का नाम और ‘फूल-घास’ सिंबल अस्थायी रूप से रोका
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को जारी अंतरिम आदेश में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और उसके आरक्षित ‘Flowers and Grass’ यानी फूल-घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया।
आयोग के मुताबिक दोनों गुट खुद को असली TMC बता रहे हैं। इसलिए पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नाम-सिंबल के दावे पर विस्तृत फैसला किया जाना बाकी है। फिलहाल दोनों पक्षों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
दोनों गुटों से मांगे गए नए नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को तीन-तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न बताने के लिए कहा था। इन विकल्पों के आधार पर मौजूदा उपचुनावों के लिए दोनों गुटों की अलग पहचान तय की जानी है।
यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है। इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग ने अंतिम रूप से यह तय कर दिया है कि TMC का वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण किस गुट के पास रहेगा। अंतिम विवाद पर आगे निर्णय होना है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है। उन्होंने TMC विवाद को पहले के शिवसेना और NCP विवादों से जोड़ते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से संबंधित मुद्दा बताया।
उन्होंने अपनी पोस्ट में “वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया।
वहीं, विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी TMC के नाम और चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से रोकने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। इन नेताओं की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक आरोप और बयान हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतरिम व्यवस्था दोनों गुटों को समान स्थिति में रखने और मौजूदा उपचुनावों में भ्रम रोकने के लिए की गई है।
आगे क्या होगा?
अब मुख्य सवाल यह है कि TMC के संगठनात्मक नियंत्रण और मूल नाम-सिंबल पर अंतिम फैसला किस आधार पर होगा। चुनाव आयोग को दोनों गुटों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों, दावों और समर्थन से जुड़े रिकॉर्ड पर विचार करना है।
फिलहाल आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा। अंतिम निर्णय आने तक TMC के पारंपरिक नाम और ‘फूल-घास’ वाले चिह्न का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
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