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हूतियों के खिलाफ सऊदी की मदद करेगा ब्रिटेन: लड़ाकू विमानों में हवा में ईंधन भरेंगे RAF टैंकर; 1.2 लाख यमनी लोग बेघर

RAF का वॉयजर टैंकर साइप्रस से ऑपरेट करने की तैयारी; लाल सागर के अहम समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदब के आसपास बढ़ा तनाव

लंदन/रियाद। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच ब्रिटेन ने सऊदी अरब को हवाई अभियानों में मदद देने का फैसला किया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के अनुसार, ब्रिटेन एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर विमान उपलब्ध कराएगा। इससे सऊदी लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन मिल सकेगा और वे लंबे समय तक उड़ान भर सकेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, संघर्ष बढ़ने के कारण अब तक 1.2 लाख से अधिक यमनी लोग विस्थापित हो चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में 3 हजार से अधिक यमनी लोग लाल सागर पार कर जिबूती पहुंचे हैं।

साइप्रस से ऑपरेट करेगा RAF वॉयजर

ब्रिटेन सऊदी अरब की सहायता के लिए रॉयल एयर फोर्स का वॉयजर टैंकर विमान तैनात कर सकता है। यह विमान साइप्रस स्थित RAF अक्रोटिरी एयरबेस से ऑपरेट करने की संभावना है।

वॉयजर हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल होता है। इससे लड़ाकू विमानों को बार-बार एयरबेस लौटने की जरूरत कम पड़ती है।

ब्रिटेन के पास कुल 9 वॉयजर विमान हैं। इनमें 8 सैन्य उपयोग के लिए और एक सिविलियन रजिस्ट्रेशन वाला विमान है, जिसे जरूरत पड़ने पर सैन्य भूमिका में इस्तेमाल किया जा सकता है। सऊदी अरब को यह सहायता कुछ हफ्तों के लिए दिए जाने की बात कही गई है।

सऊदी में पहले से तैनात है स्काई सेबर सिस्टम

ब्रिटेन इस साल सऊदी अरब में स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात कर चुका है। यह प्रणाली ड्रोन और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जाती है।

हूतियों के खिलाफ ब्रिटेन पहले भी कर चुका है कार्रवाई

ब्रिटेन जनवरी 2024 में अमेरिका के साथ मिलकर यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई कार्रवाई कर चुका है। यह अभियान लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हूती हमलों के बाद शुरू किया गया था।

अप्रैल 2025 में भी ब्रिटेन और अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था। इस दौरान ब्रिटिश RAF टाइफून लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर हूती ड्रोन निर्माण से जुड़े एक ठिकाने को निशाना बनाया था। इन अभियानों में वॉयजर टैंकर विमानों से टाइफून जेट्स को हवा में ईंधन दिया गया था।

बाब-अल-मंदब के आसपास बढ़ी सैन्य गतिविधि

रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाकों ने इस महीने लाल सागर के तटीय इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। बाब-अल-मंदब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।

सऊदी अरब ने तटीय इलाकों में हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। वहीं हूतियों ने सऊदी शहरों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है।

सऊदी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा

ब्रिटिश सरकार के अनुसार, जुलाई से हूतियों ने अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू समेत कई सऊदी शहरों, एयरपोर्ट, सैन्य प्रतिष्ठानों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है। लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमलों की बात भी कही गई है।

जिबूती ने युद्ध में शामिल होने से किया इनकार

यमन के सामने स्थित जिबूती ने स्पष्ट किया है कि वह हूतियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता। हालांकि, जिबूती में अमेरिका और चीन समेत कई देशों की सैन्य मौजूदगी है। अमेरिका 2003 से वहां कैंप लेमोनियर सैन्य बेस संचालित करता है।

2014 से जारी है यमन का संघर्ष

यमन में गृहयुद्ध 2014 में शुरू हुआ था। संघर्ष में हूती लड़ाकों के सामने यमनी सरकार के समर्थन वाली सेनाएं हैं और सऊदी अरब यमनी सरकार का समर्थन करता है।

2022 में संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से संघर्ष विराम हुआ था, लेकिन बाद में तनाव फिर बढ़ गया। अब मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।

यमन के पास स्थित बाब-अल-मंदब स्ट्रेट अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां संघर्ष बढ़ने का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

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