ओबामा के करीबी से ट्रम्प के खास तक पहुंचे मार्क जुकरबर्ग: कभी जेल भेजने की धमकी मिली, अब AI नियमों पर साथ काम कर रहे
मार्क जुकरबर्ग और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया है। जानें 2021 के सोशल मीडिया विवाद, मेटा के समझौते और AI सुरक्षा नीति में जुकरबर्ग की भूमिका।

धों में सुधार दिखाई देने लगा।
ट्रम्प के करीब आने के लिए जुकरबर्ग ने उठाए कई कदम
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मेटा और जुकरबर्ग ने संबंध सुधारने के लिए कई कदम उठाए।
- शपथ ग्रहण समारोह के लिए दान: मेटा ने ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 10 लाख डॉलर का योगदान दिया।
- मुकदमे का समझौता: मेटा ने ट्रम्प के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर रोक लगाए जाने से जुड़े मुकदमे को समाप्त करने के लिए लगभग 2.5 करोड़ डॉलर के समझौते पर सहमति जताई।
- कंपनी में नियुक्तियां: मेटा ने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े जोएल कपलान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। बाद में ट्रम्प प्रशासन की पूर्व अधिकारी डीना पॉवेल मैककॉर्मिक को भी कंपनी का अध्यक्ष बनाया गया।
- कंटेंट मॉडरेशन में बदलाव: मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट और सामग्री की निगरानी से जुड़ी नीतियों में बदलाव किए। रिपब्लिकन नेताओं ने पहले आरोप लगाया था कि कंपनी रूढ़िवादी विचारों को दबाती है।
इन कदमों को दोनों पक्षों के बीच संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा गया है। हालांकि, इनसे जुकरबर्ग के फैसलों के पीछे किसी एक उद्देश्य को निश्चित रूप से साबित नहीं किया जा सकता।
AI सुरक्षा समझौते में जुकरबर्ग की भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, जुकरबर्ग ने Nvidia के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार करने में भूमिका निभाई। व्हाइट हाउस में टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई।
इस समझौते का उद्देश्य AI तकनीक के लिए मानक तैयार करना, उन्हें लागू करने और उनकी जांच करने से जुड़े तरीकों पर काम करना बताया गया है।
जुकरबर्ग का मानना है कि AI से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को तकनीकी सुधारों के जरिए दूर किया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए समझौते की कानूनी बाध्यता सीमित है और इसमें कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया है।
ट्रम्प से नजदीकी पर उठ रहे सवाल
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प और जुकरबर्ग के बीच बढ़ती नजदीकी से मेटा को राजनीतिक और कारोबारी लाभ मिलने की चर्चा है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि बड़ी टेक कंपनियों और सरकार के बीच संबंधों में पारदर्शिता जरूरी है।
डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को पत्र लिखकर रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प से जुड़ी परियोजनाओं को दिए गए वित्तीय योगदान के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए बड़ी रकम खर्च की और अब उसे इसका लाभ मिल रहा है।
ये आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं। इनसे अपने आप यह साबित नहीं होता कि मेटा को किसी सरकारी फैसले में अनुचित लाभ दिया गया है।
जुकरबर्ग के लिए आगे क्या चुनौतियां हो सकती हैं?
ट्रम्प प्रशासन के साथ बेहतर संबंधों से मेटा को नीति-निर्माण से जुड़े संवाद में भागीदारी का अवसर मिल सकता है। लेकिन अमेरिकी राजनीति में सत्ता परिवर्तन या कांग्रेस में बहुमत बदलने की स्थिति में कंपनी को नए सवालों और जांच का सामना भी करना पड़ सकता है।
कुछ पूर्व ट्रम्प समर्थकों ने भी जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीतिक रणनीति पर संदेह जताया है। उनका मानना है कि यह बदलाव विचारधारा से अधिक कंपनी के व्यावसायिक हितों से जुड़ा हो सकता है। यह आलोचकों की राय है, न कि जुकरबर्ग की मंशा का प्रमाण।
कभी टकराव, अब AI पर सहयोग
मार्क जुकरबर्ग और डोनाल्ड ट्रम्प के संबंधों में आया बदलाव अमेरिकी राजनीति और बड़ी टेक कंपनियों के बीच बदलते समीकरणों को दर्शाता है। पहले सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर दोनों के बीच विवाद था, जबकि अब AI नीति और तकनीकी सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग की खबरें सामने आ रही हैं।
हालांकि, इस नजदीकी का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में सरकारी नीतियों, चुनावी घटनाक्रम और टेक कंपनियों की भूमिका पर निर्भर करेगा।




