मिट्टी की मूर्तियों में साकार होंगी कान्हा की बाल लीलाएं
श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में जन्माष्टमी की भव्य तैयारियां, झांकियां रहेंगी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

बठिंडा। अग्रवाल कॉलोनी स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मठ में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी, जबकि इससे पहले 2 सितंबर को श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री राधावल्लभ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। रथ यात्रा शाम 3:30 बजे मठ परिसर से शुरू होगी, जिसमें दोनों विग्रहों को मंदिर के गर्भगृह से रथ पर विराजमान कर शहर के विभिन्न बाजारों में भ्रमण करवाया जाएगा और श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करवाए जाएंगे। जन्माष्टमी के दिन सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक श्रीमद्भागवत पाठ का आयोजन होगा। इसके बाद रात 8 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक भजन संध्या आयोजित की जाएगी। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य अवसर पर विशेष कालीय महाभिषेक दर्शन करवाए जाएंगे। अगले दिन 5 सितंबर को दोपहर 1 बजे से श्री नंदोत्सव और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर मठ परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां तैयार की जा रही हैं। इन झांकियों में कान्हा के बाल स्वरूप से जुड़े विभिन्न धार्मिक प्रसंगों को मिट्टी की मूर्तियों के माध्यम से जीवंत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। मूर्तिकार पिछले कई दिनों से इन मूर्तियों को तैयार करने में जुटे हुए हैं और अब उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। झांकियों में श्रीकृष्ण जन्म से लेकर उनकी विभिन्न बाल लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों को दर्शाया जाएगा, जो जन्माष्टमी के दिन मठ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के चंद्रमा में मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी की रात 12 बजे बालकृष्ण के विग्रह का पंचामृत अभिषेक किया जाता है। पंचामृत में दूध, दही, घृत, शहद और शर्करा का प्रयोग किया जाएगा। इसके बाद भगवान को शुद्ध जल से स्नान करवाकर नए वस्त्र धारण करवाए जाएंगे तथा गंध, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप से पूजा-अर्चना की जाएगी। पूजन के बाद श्री गोपाल सहस्रनाम, विष्णु सहस्रनाम और राम स्तुति आदि स्तोत्रों का पाठ भी किया जाएगा। मठ प्रबंधन की ओर से जन्माष्टमी के धार्मिक आयोजनों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर की सजावट पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के अन्य मंदिरों में भी जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, झांकियां और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष आरती और पूजा-अर्चना के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा।




