मानसून की विदाई शुरू, 45% जिलों में बारिश का कोटा अधूरा
राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू, देश के करीब 45% जिलों में बारिश सामान्य से कम; पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों में अभी बारिश की उम्मीद

नई दिल्ली। देश में मानसून की विदाई का दौर शुरू हो गया है। राजस्थान से मानसून लौटने लगा है और आने वाले दिनों में इसके पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र से भी धीरे-धीरे विदा होने की संभावना है। इस बीच देश के करीब 45 प्रतिशत जिलों में बारिश का सामान्य कोटा अभी पूरा नहीं हुआ है।
मानसून के अंतिम चरण में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है, वहां क्या आने वाले दिनों में बारिश की कमी पूरी हो पाएगी। बारिश की स्थिति का असर खेती, जलस्रोतों और आने वाले समय में पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
राजस्थान से हुई मानसून की विदाई की शुरुआत
राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। इसके बाद मानसून धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अन्य हिस्सों से कमजोर होगा। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भी अब मानसून के अंतिम दौर की बारिश पर नजर है।
करीब आधे जिलों में बारिश का कोटा अधूरा
इस साल देश के करीब 45 प्रतिशत जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंचा है। मानसून की विदाई शुरू होने के साथ इन जिलों में बारिश की कमी पूरी होने की संभावना सीमित होती जा रही है। हालांकि मानसून की अंतिम बारिश से कुछ क्षेत्रों में स्थिति में बदलाव हो सकता है।
10 साल पहले पानी पहुंचाना पड़ा था
मानसून की कमी का असर कितना गंभीर हो सकता है, इसका उदाहरण करीब 10 साल पहले देखने को मिला था। उस समय बारिश की कमी के कारण महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में पानी का संकट इतना बढ़ गया था कि ट्रेन से पानी पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी थी। इस बार भी कम बारिश वाले क्षेत्रों में जल उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है।
खेती और पानी पर पड़ेगा असर
मानसून की बारिश देश की खेती और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है। जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, वहां इसका असर फसलों, भूजल स्तर और जलाशयों पर पड़ सकता है। हालांकि अलग-अलग राज्यों और जिलों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रही है।
मानसून की विदाई के साथ अब मौसम विभाग और प्रशासन की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में कितनी बारिश होती है और कम बारिश वाले जिलों में स्थिति कितनी सुधरती है।




