MP में रोबोट से होगी पानी-सीवर लाइनों की जांच
इंदौर के भागीरथपुरा हादसे के बाद सरकार का बड़ा फैसला; 70 से 900 मिमी पाइपलाइनों की होगी जांच, बिना सड़क खोदे लीकेज और अवैध कनेक्शन का पता लगाएगा रोबोट

भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर लाइनों की स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिमी व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की एक विशेषज्ञ एजेंसी को एम्पैनल किया गया है।
बिना सड़क खोदे होगी पाइपलाइन की जांच
इस तकनीक में पाइपलाइन की अंदरूनी स्थिति जानने के लिए सड़क की खुदाई करने की जरूरत नहीं होगी। रोबोट को मौजूदा मैनहोल, एयर रिलीज वाल्व या दूसरे एक्सेस पॉइंट के जरिए पाइपलाइन के अंदर भेजा जाएगा।
रोबोट में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगे होंगे। करीब 300 मीटर लंबे केबल के जरिए इसे नियंत्रित किया जाएगा। यह पाइपलाइन के अंदर वीडियो रिकॉर्डिंग और जरूरी डेटा जुटाएगा।
इससे पाइप में लीकेज, टूट-फूट और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।
भागीरथपुरा हादसे के बाद लिया गया फैसला
दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की वजह से 36 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पेयजल में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए थे।
स्रोत के अनुसार, सीवर लाइन लीक होने से दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। भागीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले थे, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने की स्थिति सामने आई।
इसके बाद सरकार ने GIS प्लेटफॉर्म ‘गरुड़’ के जरिए प्रदेश में पानी और सीवर पाइपलाइनों की मैपिंग कराई। इसमें 2.30 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट्स चिन्हित किए गए, जहां दोनों तरह की पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं।
इंदौर और भोपाल में हजारों डेंजर क्रॉसिंग
मैपिंग के अनुसार इंदौर में करीब 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक ऐसे क्रॉसिंग पॉइंट्स बताए गए हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलने का खतरा हो सकता है।
अब इन संवेदनशील स्थानों और पाइपलाइनों की अंदरूनी स्थिति की जांच रोबोटिक सिस्टम से कराने की योजना है।
40 रुपए प्रति मीटर की दर से जांच
नगरीय प्रशासन विभाग ने इस काम के लिए 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि का टेंडर जारी किया था। टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया।
स्रोत के अनुसार, कंपनियों की बोली ₹440, ₹400 और ₹40 प्रति मीटर थी। सबसे कम बोली लगाने वाली चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को L1 के आधार पर एम्पैनल किया गया है।
अब संबंधित नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे।
15 से ज्यादा राज्यों में इस्तेमाल हो रही तकनीक
स्रोत में नीति आयोग के अगस्त 2026 के फ्रंटियर टेक नेटवर्क रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 15 से अधिक राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस तकनीक में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और सेंसर की मदद से पाइपलाइनों की स्थिति, लीकेज और GIS मैपिंग से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है।




