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पंजाब में बकाया DA पर हाईकोर्ट सख्त, सुप्रीम कोर्ट केस की स्टेटस रिपोर्ट तलब; चीफ सेक्रेटरी कल फिर होंगे पेश

हाईकोर्ट ने पूछा- सुप्रीम कोर्ट में अब तक सुनवाई क्यों नहीं हुई? पंजाब सरकार ने बताया- SLP की आपत्तियां दूर कर दी गईं

चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA/DR) के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की स्थिति की जानकारी मांगी।

सुनवाई के दौरान पंजाब के चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कुछ तकनीकी आपत्तियां थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है।

हाईकोर्ट ने मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और मंगलवार को फिर सुनवाई तय की है। चीफ सेक्रेटरी को अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त

पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें लंबित DA/DR किस्तों को जारी करने का निर्देश दिया गया था।

हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर जल्द सुनवाई शुरू नहीं करा पाती है, तो हाईकोर्ट खुद मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।

इसी के बाद पिछली सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए थे।

3 अगस्त को हाईकोर्ट ने दिया था भुगतान का आदेश

3 अगस्त 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज करते हुए कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित DA/DR किस्तों को जारी करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने कहा था कि लंबित किस्तों का भुगतान केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार किया जाए।

अदालत ने भुगतान के लिए 15 दिन की समयसीमा तय की थी। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज लगाने का भी निर्देश दिया गया था।

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की SLP

पंजाब सरकार ने 1 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की।

सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने SLP में कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की थीं।

इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन आपत्तियों को दूर कर सुप्रीम कोर्ट में अपनी चुनौती आगे बढ़ाने के लिए समय दिया था।

सरकार का तर्क- इतनी बड़ी रकम तुरंत देना मुश्किल

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक इतनी बड़ी राशि का भुगतान कम समय में करना राज्य के लिए वित्तीय और संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पंजाब के 2021 के पे रूल्स में DA के लिए केंद्रीय दर या कोई निश्चित फॉर्मूला अनिवार्य नहीं किया गया है और DA की दर तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

हाईकोर्ट ने केंद्रीय पैटर्न का दिया था हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 6वें पंजाब पे कमीशन की सिफारिशों का उल्लेख किया था। कोर्ट के अनुसार, कमीशन ने केंद्रीय पैटर्न के आधार पर DA जारी रखने की सिफारिश की थी और राज्य सरकार ने उस सिफारिश को स्वीकार किया था।

फैसले में 2021 के बाद जारी विभिन्न DA आदेशों का भी उल्लेख किया गया था।

करीब 6 हजार करोड़ के भुगतान का सरकार का दावा

सरकार ने अदालत के समक्ष बताया था कि अब तक करीब 6,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।

सरकार के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों के पेंशनर्स और अन्य बकाया राशि का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

कर्मचारियों ने करीब 14,200 करोड़ के बकाये का दावा किया

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राज्य के राजस्व में वृद्धि हुई है और करीब 14,200 करोड़ रुपए के बकाये का भुगतान किया जा सकता है।

वहीं सरकार का कहना है कि ज्यादा राजस्व आने का मतलब यह नहीं है कि पूरी राशि तुरंत उपलब्ध है। सरकार के सामने वेतन, पेंशन, कर्ज और ब्याज समेत कई अन्य वित्तीय दायित्व भी हैं।

सरकार ने 50% DA देने का भरोसा दिया

DA विवाद के बीच सरकारी कर्मचारियों और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच बैठक भी हुई थी। बैठक में कर्मचारियों को 50 प्रतिशत DA देने पर सहमति बनने की बात सामने आई।

सरकार ने बकाया DA में से 8 प्रतिशत DA जारी करने का फैसला बताया था। इससे सरकार पर करीब 248 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने का अनुमान है।

अब चीफ सेक्रेटरी की अगली पेशी पर नजर

फिलहाल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित SLP की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

मंगलवार को होने वाली सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा को फिर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अब अदालत में यह स्पष्ट किया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की याचिका किस स्थिति में है और उसकी सुनवाई शुरू कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

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