ब्राजील में लूला दा सिल्वा की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया
पहले चरण में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में पलटा मुकाबला, 51.79% वैध वोट मिले; विपक्ष ने चुनाव परिणाम को चुनौती देने के संकेत दिए

ब्राजीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है। 25 अक्टूबर को हुए दूसरे चरण के मतदान में उन्होंने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को पराजित किया। ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण के अनुसार, लूला को 51.79 प्रतिशत वैध मत मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ लूला ने अपने गैर-लगातार चौथे राष्ट्रपति कार्यकाल का रास्ता साफ किया।
पहले चरण में पिछड़े, दूसरे दौर में हासिल की जीत
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव दो चरणों में कराया जाता है। पहले चरण में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वैध मत नहीं मिलने पर शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मतदान होता है।
4 अक्टूबर को हुए पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत और लूला दा सिल्वा को 45.16 प्रतिशत वैध वोट मिले थे। दूसरे चरण में लूला ने मुकाबले में वापसी करते हुए जीत दर्ज की। ब्राजील के चुनावी इतिहास में पहले चरण में पीछे रहने के बाद दूसरे चरण में राष्ट्रपति चुनाव जीतने का यह पहला मामला बताया गया है।
चुनाव परिणाम पर विवाद के संकेत
लूला की जीत के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार करने से इनकार किया और मतदान की अवधि बढ़ाए जाने पर सवाल उठाते हुए परिणाम रद्द करने की मांग करने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार, मतदान अवधि बढ़ाने के फैसले को लेकर विवाद सामने आया है। हालांकि, आधिकारिक चुनाव परिणाम में लूला को विजेता घोषित किया गया है।
लूला का राजनीतिक सफर
लूला दा सिल्वा मजदूर आंदोलन से राजनीति में आए और वर्कर्स पार्टी के प्रमुख नेता बने। वह 2003 से 2010 तक लगातार दो कार्यकाल राष्ट्रपति रहे। इसके बाद 2022 के चुनाव में जीतकर सत्ता में लौटे और अब 2026 के चुनाव में चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं।
उनके राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव भी रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा था, लेकिन बाद में उनकी सजा रद्द कर दी गई। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में वापसी की।
गरीबों और मजदूरों पर रहेगा फोकस
चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने गरीब परिवारों को आर्थिक राहत देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और मजदूरों की स्थिति सुधारने पर जोर दिया। उनकी सरकार के सामने इन वादों को लागू करने के साथ-साथ महंगाई, सरकारी कर्ज और आर्थिक विकास जैसी चुनौतियां भी रहेंगी।
संसद में विपक्ष की चुनौती
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बावजूद लूला के लिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा। संसद में दक्षिणपंथी दलों और विपक्षी नेताओं का प्रभाव बना हुआ है। ऐसे में सरकारी खर्च, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक सुधारों से जुड़े फैसलों के लिए उन्हें अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह जीत?
ब्राजील और भारत दोनों ब्रिक्स समूह के सदस्य हैं और व्यापार, ऊर्जा, कृषि तथा वैश्विक मंचों पर सहयोग करते हैं। लूला की नई जीत के बाद दोनों देशों के संबंधों में निरंतरता की संभावनाओं पर नजर रहेगी। हालांकि, भारत-ब्राजील संबंधों में किसी खास बदलाव को लेकर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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RNI No. HRHIN/25/A0418
चुनाव परिणाम और मत प्रतिशत ब्राजील के चुनाव प्राधिकरण के प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित हैं। विपक्ष की आपत्तियों को आधिकारिक परिणाम से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।




