ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नॉर्वे पर निकाली भड़ास, बोले—वहां के लोगों को अमेरिका नहीं आने देना चाहता
मिशिगन की रैली में अमेरिकी राष्ट्रपति ने नॉर्वे की आलोचना की; कहा—कई युद्ध रुकवाने में मदद की, फिर भी नहीं मिला शांति पुरस्कार

वॉशिंगटन/पोर्ट ह्यूरॉन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जाहिर की है। रविवार को मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन में आयोजित राजनीतिक रैली के दौरान उन्होंने नॉर्वे की आलोचना करते हुए कहा कि वह वहां के लोगों को अमेरिका नहीं आने देना चाहते, क्योंकि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। ट्रम्प के इस बयान की रिपोर्ट रॉयटर्स ने दी है।
‘नोबेल नहीं मिला, इसलिए नॉर्वे से किसी को नहीं आने देना चाहता’
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने अपने संबोधन में नॉर्वे के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने के कारण वह नॉर्वे से लोगों का अमेरिका आना नहीं चाहते। उन्होंने फ्रांस में हुई हालिया हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराने की बात भी कही।
ट्रम्प लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराने या रोकने में मदद की है और इस काम के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। हालांकि, उनके सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर अलग-अलग मामलों में सवाल उठते रहे हैं।
नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला कौन करता है?
नोबेल शांति पुरस्कार के चयन को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसका फैसला नॉर्वे की सरकार सीधे तौर पर नहीं करती। पुरस्कार विजेता का चयन नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है। इस समिति में पांच सदस्य होते हैं, जिन्हें नॉर्वे की संसद नियुक्त करती है।
इसलिए पुरस्कार न मिलने पर नॉर्वे की सरकार को जिम्मेदार ठहराना चयन प्रक्रिया की वास्तविक भूमिका से अलग है।
2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नवी पिल्लै को मिला
2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवनेथेम ‘नवी’ पिल्लै को दिया गया। नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया। इसकी घोषणा 9 अक्टूबर 2026 को की गई थी।
इस घोषणा के बाद ट्रम्प ने पुरस्कार चयन पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पिल्लै को लेकर भी टिप्पणी की और दावा किया कि उनके अपने कूटनीतिक प्रयासों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिला।
क्या नॉर्वे के नागरिकों पर कोई नया प्रतिबंध लगा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प के बयान के समय ऐसा कोई संकेत नहीं था कि अमेरिकी प्रशासन ने नॉर्वे के नागरिकों के आव्रजन पर कोई नई आधिकारिक नीति लागू कर दी हो। इसलिए रैली में कही गई बात को किसी लागू सरकारी आदेश या नए प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ट्रम्प के इस बयान से नोबेल पुरस्कार चयन प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और प्रवासन नीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।




