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‘एनालॉग पनीर’ को लेकर 5 राज्यों में कार्रवाई: डेयरी पनीर से अलग है ये प्रोडक्ट, खरीदते समय बरतें सावधानी

पनीर जैसा दिखने वाला एनालॉग उत्पाद अलग सामग्री से तैयार किया जाता है; डेयरी पनीर के नाम पर बेचने से उपभोक्ता के साथ हो सकती है धोखाधड़ी

नई दिल्ली, 16 अगस्त। ‘एनालॉग पनीर’ को लेकर हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में चर्चा तेज हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात में इसके उत्पादन, बिक्री या वितरण के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विवाद की मुख्य वजह यह है कि कुछ जगहों पर ऐसे उत्पाद को डेयरी पनीर के रूप में बेचने या परोसने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को यह पता नहीं चल पाता कि वे असली डेयरी पनीर खरीद रहे हैं या उसका विकल्प। एनालॉग पनीर पारंपरिक डेयरी पनीर से अलग उत्पाद है और इसे दूध से बने पनीर की तरह ही दिखने एवं उपयोग के लिए तैयार किया जा सकता है। इसकी संरचना में इस्तेमाल होने वाली सामग्री उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है और कुछ उत्पादों में मिल्क सॉलिड्स, वनस्पति वसा या अन्य खाद्य सामग्री एवं एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी उत्पादन लागत पारंपरिक डेयरी पनीर की तुलना में कम हो सकती है, जिसके कारण व्यावसायिक खाद्य कारोबार में इसका इस्तेमाल किया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एनालॉग उत्पाद को डेयरी पनीर बताकर बेचना उपभोक्ता को गलत जानकारी देना हो सकता है और खाद्य लेबलिंग एवं सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य यही है कि ग्राहक को उत्पाद की सही जानकारी मिले और वह यह समझ सके कि उसे किस प्रकार का खाद्य पदार्थ बेचा जा रहा है। इसलिए पैकेट वाला पनीर खरीदते समय केवल कीमत या दिखावट के आधार पर फैसला न करें। पैकेट पर दिए गए उत्पाद के नाम, सामग्री, निर्माता या पैकर की जानकारी, FSSAI लाइसेंस नंबर, पोषण संबंधी विवरण, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि तथा स्टोरेज निर्देश जरूर देखें। यदि किसी पैकेट पर डेयरी पनीर होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है या उसमें वनस्पति वसा/अन्य विकल्प वाली सामग्री दर्ज है तो उसे खरीदने से पहले लेबल को ध्यान से पढ़ें। होटल, रेस्टोरेंट या ढाबे में पनीर से बनी डिश ऑर्डर करते समय भी उपभोक्ता यह पूछ सकता है कि उसमें डेयरी पनीर इस्तेमाल किया गया है या कोई एनालॉग विकल्प। केवल स्वाद, रंग, बनावट या कीमत देखकर डेयरी और एनालॉग पनीर की विश्वसनीय पहचान करना हमेशा संभव नहीं होता, इसलिए पैकेज्ड उत्पाद में लेबल सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर उसका प्रभाव उसकी सामग्री, मात्रा और व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए एनालॉग पनीर को केवल ‘नकली पनीर’ कहकर समझना सही नहीं होगा; यह एक अलग खाद्य उत्पाद हो सकता है, लेकिन उसे डेयरी पनीर के नाम पर बेचना उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी का मामला बन सकता है। उपभोक्ताओं को खुले में बिक रहे बिना लेबल वाले पनीर की खरीदारी में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और संदिग्ध गुणवत्ता या गलत लेबलिंग की स्थिति में संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करनी चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि ग्राहक को जो उत्पाद दिया जा रहा है, उसकी वास्तविक पहचान और सामग्री स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए। पनीर खरीदते समय जागरूक रहें, लेबल पढ़ें और केवल कीमत कम होने के कारण किसी संदिग्ध उत्पाद को डेयरी पनीर समझकर न खरीदें

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