रक्षाबंधन पर साइबर फ्रॉड का खतरा: ऑनलाइन राखी और गिफ्ट खरीदते समय बरतें ये 9 सावधानियां
फर्जी शॉपिंग वेबसाइट, कूरियर कॉल, कैशबैक और WhatsApp लिंक के जरिए ठगी का खतरा; जल्दबाजी में पेमेंट करने से पहले जरूर करें वेबसाइट और सेलर की जांच

नई दिल्ली, 16 अगस्त। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही ऑनलाइन राखी, मिठाई और गिफ्ट की खरीदारी बढ़ जाती है, लेकिन इसी के साथ साइबर ठग भी लोगों को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके अपनाने लगते हैं। भारी डिस्काउंट, फ्री गिफ्ट, एक्सप्रेस डिलीवरी और लिमिटेड टाइम ऑफर का लालच देकर ठग फर्जी शॉपिंग वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन और WhatsApp मैसेज के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं। कई मामलों में ग्राहक से ऑनलाइन पेमेंट करा लेने के बाद सामान डिलीवर नहीं किया जाता, जबकि कुछ मामलों में नकली या घटिया सामान भेज दिया जाता है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक त्योहारों के दौरान सबसे ज्यादा सावधानी फर्जी वेबसाइट, फेक कस्टमर केयर, फर्जी कूरियर कॉल, रिफंड लिंक, कैशबैक ऑफर और संदिग्ध QR कोड से बरतनी चाहिए। ऑनलाइन राखी या गिफ्ट खरीदने से पहले वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें और केवल भरोसेमंद तथा आधिकारिक वेबसाइट या जाने-पहचाने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से ही खरीदारी करें। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले विज्ञापन को देखकर तुरंत खरीदारी न करें, क्योंकि असली ब्रांड जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाए जा सकते हैं। वेबसाइट पर रिव्यू, रेटिंग, रिटर्न पॉलिसी, कंपनी का पता और ग्राहक सेवा की जानकारी जरूर देखें। यदि किसी उत्पाद की कीमत बाजार भाव से बहुत कम है या कोई वेबसाइट असामान्य रूप से भारी छूट और फ्री गिफ्ट का दावा कर रही है तो सावधान रहें। रक्षाबंधन के आसपास ठग WhatsApp पर ‘आपके लिए गिफ्ट आया है’, ‘राखी गिफ्ट क्लेम करें’ या ‘आपका पार्सल रुका हुआ है’ जैसे संदेश भेज सकते हैं और इनके साथ संदिग्ध लिंक भी दिया जा सकता है। ऐसे लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी अनजान वेबसाइट पर बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी दर्ज न करें। इसी तरह फेक कूरियर स्कैम में ठग डिलीवरी एजेंट बनकर फोन कर सकते हैं और पता अपडेट करने, डिलीवरी चार्ज जमा करने या पार्सल रिलीज कराने के नाम पर OTP, कार्ड डिटेल या UPI से भुगतान मांग सकते हैं। ध्यान रखें कि किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, CVV या बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी नहीं देनी चाहिए। कैशबैक या रिवॉर्ड के नाम पर भेजे गए QR कोड को स्कैन करने से भी बचें, क्योंकि पैसे प्राप्त करने के लिए आमतौर पर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती; यदि कोई व्यक्ति पैसे मिलने के नाम पर PIN डालने या Collect Request स्वीकार करने को कह रहा है तो यह ठगी का संकेत हो सकता है। फेक कस्टमर केयर स्कैम से बचने के लिए कंपनी का हेल्पलाइन नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही प्राप्त करें। इंटरनेट सर्च में ऊपर दिखाई देने वाले किसी भी नंबर पर आंख बंद करके भरोसा न करें। ठग रिफंड या शिकायत के समाधान के नाम पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए भी कह सकते हैं, इसलिए ऐसे ऐप बिना जरूरत इंस्टॉल न करें और किसी अनजान व्यक्ति को अपने मोबाइल की स्क्रीन या बैंकिंग ऐप तक पहुंच न दें। फर्जी ट्रैकिंग लिंक से भी सावधान रहें, क्योंकि इनके जरिए फोन में खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कराने या निजी जानकारी चुराने की कोशिश हो सकती है। ऑनलाइन खरीदारी करते समय जहां संभव हो, भरोसेमंद भुगतान माध्यम का इस्तेमाल करें और ऑर्डर की पुष्टि, पेमेंट रसीद तथा ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो उसे तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचना देनी चाहिए और भारत के आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। त्योहार की खरीदारी के दौरान कुछ मिनट की अतिरिक्त सावधानी आपकी मेहनत की कमाई और निजी जानकारी दोनों को सुरक्षित रख सकती है।




