30 लाख के इनामी TSPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का एनकाउंटर
वाराणसी में यूपी ATS की कार्रवाई; 20 साल से फरार था उग्रवादी, हत्या-अपहरण और रंगदारी समेत 45 मामले दर्ज

रांची/चतरा। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता को यूपी ATS ने वाराणसी में मुठभेड़ के दौरान मार गिराने का दावा किया है। स्रोत के अनुसार ब्रजेश पर NIA ने 5 लाख और झारखंड पुलिस ने 25 लाख रुपए, यानी कुल 30 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
पुलिस के अनुसार, ATS को सूचना मिली थी कि ब्रजेश वेश बदलकर उत्तर प्रदेश में दाखिल होने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी की सीमा पर निगरानी बढ़ाई गई। रविवार को उसके वाराणसी पहुंचने की सूचना मिलने पर रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान के पास घेराबंदी की गई।
बाइक पर साथी के साथ पहुंचा था
स्रोत के मुताबिक, जीटी रोड की ओर से बाइक पर दो संदिग्ध आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया तो फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में ब्रजेश गंझू को गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उसका एक साथी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी बताई गई है।
ब्रजेश चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुट्टू सोहावन गांव का रहने वाला था। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी और हथियारों से जुड़े 45 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
14 साल की उम्र में उग्रवादी संगठन से जुड़ा
रिपोर्ट के अनुसार ब्रजेश करीब 14 साल की उम्र में नक्सली संगठन के बाल दस्ते में शामिल हुआ था। वर्ष 2004 में उसने नक्सलियों के खिलाफ समानांतर संगठन के रूप में TSPC खड़ा किया। बाद में संगठन की गतिविधियां चतरा, रांची, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू और लातेहार के अलावा बिहार के कुछ इलाकों तक बताई गईं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ब्रजेश ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 2010 में वह लावालौंग पंचायत के लुट्टू वार्ड से निर्विरोध वार्ड पार्षद बना। इसके बाद पंचायत का निर्विरोध मुखिया और 2015 में पंचायत समिति सदस्य चुने जाने की बात कही गई है।
45 मामलों में रंगदारी और हत्या के केस
स्रोत के मुताबिक ब्रजेश के खिलाफ दर्ज 45 मामलों में 18 रंगदारी व जबरन वसूली, 13 आर्म्स एक्ट और 5 हत्या के मामले शामिल थे। आरोप है कि कोयला खनन, परिवहन कंपनियों और ठेकेदारों से धमकी देकर लेवी वसूली जाती थी।
एनआईए के दो मामलों में भी उसकी तलाश बताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में टीएसपीसी द्वारा लेवी वसूली की जांच की गई थी और इस मामले में ब्रजेश को कथित तौर पर प्रमुख आरोपी बताया गया था।
संगठन में अब दो इनामी सदस्य बताए गए
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रजेश की मौत के बाद TSPC के सक्रिय शीर्ष कैडरों में अब 10 लाख रुपए का इनामी जोनल कमांडर आरिफ उर्फ शशिकांत और 1 लाख रुपए का इनामी सुदेश गंझू उर्फ गुरुदेव प्रमुख रूप से बचे हैं। दोनों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ाए जाने की बात कही गई है।




