बीकानेर में डेंगू का बढ़ता खतरा, 24 घंटे में 7 मरीज मिले पॉजिटिव
पीबीएम अस्पताल में मेडिसिन ओपीडी के मरीजों की संख्या 800 से पार; जिले के 12 इलाके हाई रिस्क जोन घोषित, जनवरी से अब तक 81 मामले सामने आए

बीकानेर। मानसून की विदाई और मौसम में बदलाव के साथ ही बीकानेर में डेंगू और मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। पीबीएम अस्पताल में पिछले 24 घंटे के दौरान वायरल बुखार के 70 मरीजों की जांच की गई, जिनमें से 7 मरीज डेंगू पॉजिटिव पाए गए। वहीं, मेडिसिन विभाग के आउटडोर में मरीजों की संख्या बढ़कर 800 से एक हजार के बीच पहुंच गई है।
जनवरी से अब तक बीकानेर में डेंगू के कुल 81 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक मरीज अगस्त और सितंबर में मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लक्षणों के आधार पर प्रतिदिन 70 से 80 मरीजों की डेंगू जांच कराई जा रही है, जिनमें 5 से 7 मरीज पॉजिटिव मिल रहे हैं।
अब तक 4505 मरीजों की हुई डेंगू जांच
पीबीएम अस्पताल में जनवरी से अब तक कुल 4505 मरीजों की डेंगू जांच की गई है। इनमें 43 मरीज अस्पताल में भर्ती (आईपीडी) और 38 मरीज ओपीडी में डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। कुल 81 मामलों में से 57 मरीज बीकानेर जिले के हैं, जबकि 24 मरीज अन्य जिलों से आए हैं।
राहत की बात यह है कि फिलहाल डेंगू के गंभीर मामले सामने नहीं आए हैं। वहीं, मलेरिया के अब तक केवल 11 मामले रिपोर्ट हुए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।
शहर के 12 इलाके हाई रिस्क जोन घोषित
बीकानेर शहर के 12 इलाकों को डेंगू के हाई रिस्क जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें तिलक नगर, आंबेडकर कॉलोनी, शिवबाड़ी, रानीबाजार इंडस्ट्रियल एरिया, बीछवाल इंडस्ट्रियल एरिया, शीतला गेट, लाल गुफा, धोबी धोरा, धोबी तलाई, पुरानी गिनाणी, हनुमान हत्था और जेएनवी क्षेत्र शामिल हैं।
डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ डॉ. लोकेश गुप्ता के अनुसार, इन इलाकों में डेंगू के अधिक मामले सामने आए हैं। इसके चलते प्रभावित क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य दल तैनात किए गए हैं। मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर एंटी लार्वा गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
जिला अस्पताल और सेटेलाइट अस्पताल में भी बढ़ी भीड़
पीबीएम अस्पताल के अलावा जिला अस्पताल और गंगाशहर सेटेलाइट अस्पताल में भी मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दोनों अस्पतालों में ओपीडी का आंकड़ा 800 तक पहुंच गया है।
डॉ. मुकेश वाल्मीकि के अनुसार, कई मरीजों की जांच में प्लेटलेट्स कम पाई जा रही हैं, लेकिन उनकी डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आ रही है। ऐसे मरीजों का भी डेंगू के लक्षणों के आधार पर उपचार किया जा रहा है।
वायरल बुखार को हल्के में न लें: डॉ. परमेंद्र सिरोही
मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. परमेंद्र सिरोही ने बताया कि ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने आमजन से सतर्क रहने और वायरल बुखार को हल्के में नहीं लेने की अपील की। उनके अनुसार, बुखार होने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
डेंगू से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
एसपी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. वीबी सिंह के अनुसार, डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली वायरल बीमारी है। यह मच्छर दिन में काटता है और घरों में जमा साफ पानी में पनपता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द और उल्टी शामिल हैं। बुखार कम होने के बाद भी मरीज की निगरानी जरूरी है। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या सांस लेने में तकलीफ होने पर तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।
डेंगू के उपचार में पर्याप्त आराम और शरीर में तरल पदार्थों की पूर्ति महत्वपूर्ण है। मरीज को पानी और ओआरएस दिया जा सकता है। बुखार के लिए पैरासिटामोल का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है।
डॉ. सिंह के अनुसार, प्रत्येक डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसका निर्णय मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर करते हैं। डेंगू से बचाव के लिए कूलर, गमले और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।




