छत्तीसगढ़ कांग्रेस में 20 नेताओं की घर वापसी
कुकरेजा-डोंगरे समेत 20 नेताओं का निष्कासन रद्द; 36 मामलों पर हुई थी चर्चा, अमित-रेणु जोगी और बृहस्पति सिंह समेत 16 मामलों पर फैसला बाकी

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने पार्टी से निष्कासित 20 नेताओं और कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद्द कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में कुल 36 मामलों पर विचार किया गया था। पहली सूची में रायपुर, मुंगेली, गरियाबंद, कोंडागांव और राजनांदगांव के नेताओं के नाम शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश के अनुसार संबंधित नेताओं का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द किया गया है। आदेश प्रभारी महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गैदू की ओर से जारी किया गया।
रायपुर से कुकरेजा समेत 3 नेताओं को राहत
रायपुर से आनंद कुकरेजा, पूनम पांडेय और विशाल रजानी का निष्कासन रद्द किया गया है। मुंगेली से पार्षद विनय चोपड़ा को भी पार्टी में वापसी का रास्ता साफ हुआ है।
आनंद कुकरेजा को पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था। यह कार्रवाई उनके बेटे अजीत कुकरेजा के 2023 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के बाद हुई थी।
गरियाबंद से 5 नेताओं की वापसी
गरियाबंद से गोरेलाल सिन्हा, राधोवा महाड़िक, भविष्य प्रधान, ऋतिक सिन्हा और भानुप्रताप साहू का निष्कासन रद्द किया गया है।
कोंडागांव से सुशील सोनी का नाम भी पहली सूची में शामिल है।
राजनांदगांव से 10 नेताओं को राहत
राजनांदगांव से सगीर खान, सिद्धार्थ डोंगरे, राजेश गुप्ता, जितेश सिमनकर, सकूर चौहान, सुनीता सिन्हा, आशीष सोनकर, शशांक डोंगरे, श्यामबती सिन्हा और अंजू बंजारे का निष्कासन रद्द किया गया है।
16 मामलों पर अभी फैसला बाकी
अनुशासन समिति के सामने रखे गए 36 मामलों में से 20 में निष्कासन रद्द करने का फैसला हो चुका है। बाकी 16 मामलों पर अभी निर्णय लंबित है। इनमें अमित जोगी, रेणु जोगी और पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
इन मामलों पर आगे संगठन स्तर पर विचार किया जाना है। इसलिए इन नेताओं की कांग्रेस में वापसी को लेकर फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
निष्कासन रद्द होने के बाद सक्रिय राजनीति का रास्ता खुला
कांग्रेस की ओर से जारी आदेश के बाद जिन नेताओं का निष्कासन रद्द हुआ है, उनके लिए पार्टी संगठन में दोबारा सक्रिय होने का रास्ता खुल गया है। यह प्रक्रिया विधानसभा और निकाय चुनावों के दौरान हुई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा के बाद आगे बढ़ाई गई है।
फिलहाल पार्टी की पहली सूची जारी हो चुकी है और बाकी 16 मामलों पर होने वाले फैसले का इंतजार है।




