देश के सभी बीएड कॉलेज आरटीई के दायरे में आएंगे, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
एनसीटीई को भी कानून के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू, बीएड कॉलेजों की फीस और नामांकन व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

भागलपुर। देशभर के बीएड कॉलेजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्देश की जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार, अब सभी बीएड कॉलेजों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) को भी इसके दायरे में लाने की बात कही गई है।
परफॉर्मेंस अप्रैजल रिपोर्ट (पीएआर) की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया। इसके बाद एनसीटीई ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम से अब तक आरटीई के दायरे से बाहर रहे बीएड कॉलेजों पर भी कानून के प्रावधान लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
निजी बीएड कॉलेजों की फीस बनी चुनौती
देश में शिक्षक बनने के लिए बीएड प्रमुख पाठ्यक्रमों में शामिल है। वर्तमान में निजी बीएड कॉलेजों की संख्या सरकारी कॉलेजों से अधिक है। सरकारी संस्थानों में फीस अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वहां सीटें सीमित हैं। दूसरी ओर, निजी कॉलेजों की अधिक फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए दाखिला लेना मुश्किल हो सकता है।
निजी बीएड कॉलेज संघ के अध्यक्ष अमर साह के अनुसार, अब तक बीएड कॉलेज आरटीई के दायरे में नहीं थे। ऐसे में नए निर्देश के बाद बीएड संस्थानों पर लागू होने वाले नियमों और व्यवस्था को लेकर बदलाव की संभावना है।
नामांकन और फीस व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
बीएड कॉलेजों को आरटीई के दायरे में लाने की प्रक्रिया से नामांकन और फीस संबंधी व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। हालांकि, फीस संरचना और दाखिले के नियमों में किस तरह के बदलाव होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
आरटीई के दायरे के विस्तार से जुड़ी प्रमुख बातें
- आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को राहत: निजी कॉलेजों की अधिक फीस के कारण दाखिले में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने की संभावना है।
- फीस और अतिरिक्त खर्च: दाखिले, प्रैक्टिकल और अन्य मदों में वसूले जाने वाले शुल्क की व्यवस्था में बदलाव हो सकता है।
- एनसीटीई की भूमिका: एनसीटीई को भी आरटीई के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
- व्यवस्था में बदलाव: नए निर्देश के बाद बीएड कॉलेजों के संचालन और नामांकन से जुड़े नियमों पर असर पड़ सकता है।




