PMCH में फरवरी से किडनी-बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी: स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बाद तेज हुआ काम
अस्पताल प्रशासन ने फरवरी तक कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने का लक्ष्य रखा; सरकारी अस्पताल में सुविधा मिलने से राज्य के मरीजों को बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है

पटना के PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) में किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जरूरी व्यवस्थाएं जुटाने का काम शुरू कर दिया है।
PMCH प्रशासन ने फरवरी 2027 तक किडनी ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट समेत कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल अस्पताल में इसके लिए आवश्यक चिकित्सा, तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बाद शुरू हुआ काम
PMCH अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में फरवरी तक किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सहित कई ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य है।
उनके अनुसार, स्वास्थ्य विभाग से ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की मंजूरी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां आगे बढ़ा दी हैं।
इन सेवाओं के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, आवश्यक उपकरणों, ऑपरेशन और मरीजों की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं को विकसित किया जा रहा है।
8 सितंबर को हुई थी स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक
PMCH के नेफ्रोलॉजी विभाग के HOD डॉ. गोपाल प्रसाद के अनुसार, इस संबंध में 8 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग के सचिव और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ बैठक हुई थी।
बैठक में अस्पताल में ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई। विभाग से मंजूरी मिलने के बाद PMCH प्रशासन ने इस दिशा में काम तेज कर दिया है।
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वहीं बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए संबंधित विशेषज्ञ विभागों, विशेष चिकित्सा सुविधाओं और निगरानी व्यवस्था की जरूरत होगी।
कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने की योजना
अस्पताल प्रशासन की योजना केवल किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है। फरवरी तक कई प्रकार की ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए अस्पताल में जरूरी संसाधन और चिकित्सा ढांचा तैयार किया जा रहा है। ट्रांसप्लांट जैसी जटिल चिकित्सा प्रक्रिया के लिए मरीजों की जांच, विशेषज्ञों की टीम, ऑपरेशन के बाद निगरानी और फॉलोअप की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।
अभी इलाज के लिए बाहर जाते हैं मरीज
बिहार में ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले कई मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर बड़े चिकित्सा केंद्रों का रुख करना पड़ता है। किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में जाना पड़ सकता है।
राज्य के बाहर इलाज कराने पर मरीजों और उनके परिजनों को चिकित्सा खर्च के साथ रहने, खाने और आने-जाने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।
PMCH में सरकारी स्तर पर ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने पर ऐसे मरीजों को राज्य के भीतर इलाज उपलब्ध कराने का विकल्प मिल सकता है।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिल सकता है लाभ
PMCH प्रशासन के अनुसार, ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को मुफ्त ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जटिल चिकित्सा प्रक्रियाएं हैं। इनमें ट्रांसप्लांट से पहले कई तरह की जांच, विशेषज्ञों की निगरानी, प्रक्रिया के दौरान विशेष चिकित्सा व्यवस्था और बाद में लंबे समय तक फॉलोअप की जरूरत होती है।
सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट उपचार तक पहुंच आसान हो सकती है।
फरवरी 2027 की समय-सीमा पर नजर
PMCH प्रशासन ने फरवरी 2027 तक ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य तय किया है। अब अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा ढांचे और अन्य व्यवस्थाओं को तैयार करने का काम चल रहा है।
यदि तय समय-सीमा के भीतर सेवाएं शुरू होती हैं, तो यह बिहार के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में ट्रांसप्लांट सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।




