डोल ग्यारस और काल भैरव की सवारी आज: उज्जैन-इंदौर में निकलेंगे भव्य चल समारोह, हाटपीपल्या में तैरेगी 7.5 किलो की नरसिंह प्रतिमा
उज्जैन में हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगे डोल, काल भैरव को पहनाई जाएगी ग्वालियर से आई शाही पगड़ी; हाटपीपल्या में 150 साल पुरानी परंपरा निभेगी

उज्जैन। डोल ग्यारस के अवसर पर मंगलवार को मध्यप्रदेश के कई शहरों में धार्मिक आयोजन और भगवान के डोल के चल समारोह निकलेंगे। उज्जैन में विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाले डोल और झांकियां हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगी। इसी दिन भगवान काल भैरव की सवारी भी निकाली जाएगी। इंदौर और भोपाल में भी जुलूस को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है।
देवास जिले के हाटपीपल्या में करीब 150 साल पुरानी परंपरा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। यहां भगवान नरसिंह की करीब साढ़े सात किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तीन बार उतारा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रतिमा के तैरने या डूबने से आने वाले वर्ष के अच्छे-बुरे समय के संकेत मिलते हैं।
उज्जैन में डोल और काल भैरव की सवारी
डोल ग्यारस पर उज्जैन के अलग-अलग क्षेत्रों से भगवान के डोल और झांकियां चल समारोह के रूप में हरसिद्धि मंदिर पहुंचेंगी। भीड़ को देखते हुए यातायात पुलिस ने व्यवस्था में बदलाव किया है। शाम 4 बजे से राजवाड़ा क्षेत्र सहित कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। यातायात दबाव के अनुसार डायवर्जन में बदलाव किया जा सकता है।
उज्जैन में भगवान काल भैरव की सवारी भी निकलेगी। ग्वालियर से सिंधिया राजवंश की ओर से विशेष वाहन से शाही पगड़ी उज्जैन लाई जाएगी। राजवंश के उदय दर महाराज सिंधिया पगड़ी लेकर पहुंचेंगे। दोपहर 3:30 बजे कलेक्टर की पूजा-अर्चना के बाद यह पगड़ी भगवान काल भैरव को धारण कराई जाएगी। इसके बाद सवारी रवाना होगी।
इंदौर में कई समाजों के निकलेंगे डोल
इंदौर में डोल ग्यारस पर अलग-अलग क्षेत्रों से धार्मिक चल समारोह निकलेंगे। राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में शाम से यातायात व्यवस्था बदली रहेगी। लोगों से वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने और भीड़ वाले क्षेत्रों में अनावश्यक वाहन नहीं लाने की अपील की गई है।
- सिद्धेश्वर हनुमान व्यायामशाला: शाम 6 बजे बाबूलाल नगर से डोल निकलेगा। राधा-कृष्ण की झांकी के साथ अखाड़े के कलाकार और बालिकाएं शस्त्र कला का प्रदर्शन करेंगी।
- कोष्टी समाज: शाम 7 बजे राजकुमार मिल स्थित श्रीराम मंदिर धर्मशाला से 43वां डोल निकलेगा। नीम करोली बाबा की झांकी रहेगी। यात्रा राजबाड़ा होते हुए हरसिद्धि मंदिर पहुंचेगी।
- लोधी समाज: शाम 7 बजे जूना रिसाला से डोल निकलेगा। राधा-कृष्ण की झांकी और अखाड़े के प्रदर्शन होंगे।
- प्रजापति समाज: शाम 6 बजे कुम्हारखाड़ी मेन रोड स्थित प्रजापति धर्मशाला से चल समारोह निकलेगा। राधा-कृष्ण की झांकी और भजनों की प्रस्तुति होगी।
- देवांग कोष्टी समाज: शाम 7 बजे परदेशीपुरा से डोल निकलेगा। समाज के अनुसार यह परंपरा 132 वर्षों से चली आ रही है। भगवान कृष्ण की मटकी फोड़ झांकी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
हाटपीपल्या में 150 साल पुरानी परंपरा
देवास जिले के हाटपीपल्या में डोल ग्यारस पर भगवान नरसिंह की पाषाण प्रतिमा को भमोरी नदी में तैराने की परंपरा निभाई जाएगी। मंदिर से भगवान की प्रतिमा का नगर भ्रमण कराया जाएगा। शोभायात्रा में अखाड़े, ढोल-ताशे और पुलिस बैंड शामिल होंगे।
नगर भ्रमण के बाद सवारी चासिया मार्ग स्थित भमोरी नदी के नरसिंह घाट पहुंचेगी। यहां पूजा-अर्चना और आरती के बाद प्रशासन की ओर से भगवान नरसिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की परंपरा है।
इसके बाद मुख्य पुजारी करीब 7.5 किलो वजनी पाषाण प्रतिमा को नदी के पानी में तीन बार उतारेंगे।
प्रतिमा के तैरने-डूबने से साल के संकेत मानने की परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार प्रतिमा के प्रत्येक बार तैरने या डूबने को आने वाले वर्ष के संकेत के रूप में देखा जाता है। प्रतिमा के तीनों बार के व्यवहार के आधार पर लोग साल की स्थिति का अनुमान लगाते हैं।
यह परंपरा धार्मिक आस्था और स्थानीय लोकविश्वास से जुड़ी हुई है। इसे देखने के लिए इंदौर, मालवा क्षेत्र और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाटपीपल्या पहुंचते हैं।
भोपाल में दोपहर 1 बजे से ट्रैफिक डायवर्जन
भोपाल में डोल ग्यारस के जुलूस को देखते हुए दोपहर 1 बजे से जरूरत के अनुसार चरणबद्ध यातायात डायवर्जन किया जाएगा। चौक बाजार से खटलापुरा मंदिर तक जुलूस के मार्ग पर वाहनों के रूट बदले जाएंगे।
पीरगेट, इमामबाड़ा, जुमेराती, सुल्तानिया रोड, बुधवारा और तलैया क्षेत्र में विशेष यातायात व्यवस्था रहेगी। भारत टॉकीज से न्यू मार्केट और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। भारी और मध्यम वाहनों के लिए भी अलग रूट तय किए गए हैं।




