गणेश विसर्जन आज: घर में भी कर सकते हैं मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन, जानें विधि और जरूरी नियम
मिट्टी की प्रतिमा का घर पर भी कर सकते हैं विसर्जन, पूजन विधि और जरूरी नियमों का रखें ध्यान

नई दिल्ली। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। दी गई जानकारी के अनुसार, दिनभर में विसर्जन किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक नियमों के मुताबिक सूर्यास्त से पहले प्रतिमा विसर्जित करना उचित माना गया है।
घर में भी कर सकते हैं मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन
छोटी मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए एक बड़े बर्तन में साफ पानी भरकर पूजा के बाद प्रतिमा उसमें रखी जा सकती है। प्रतिमा को पानी में धीरे-धीरे गलने दिया जाता है। इसके बाद बची मिट्टी का इस्तेमाल बागवानी में किया जा सकता है।
हालांकि, मिट्टी और पानी का दोबारा इस्तेमाल तभी करना चाहिए, जब प्रतिमा में पीओपी या केमिकल रंग का इस्तेमाल न हुआ हो।
गणेश पुराण में पार्थिव गणेश पूजा का उल्लेख
गणेश पुराण में मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाकर पूजा करने और अनुष्ठान पूरा होने के बाद उसे जल में विसर्जित करने का उल्लेख मिलता है। इसमें साफ, चिकनी और कंकड़ रहित मिट्टी से प्रतिमा बनाने की विधि बताई गई है। मिट्टी से बनी इस प्रतिमा को पार्थिव गणेश कहा जाता है।
ग्रंथ में व्रत या अनुष्ठान पूरा होने के बाद प्रतिमा को छत्र, ध्वज और पताकाओं के साथ नदी या तालाब में विसर्जित करने तथा वाद्य-संगीत के साथ लौटने का उल्लेख भी है।
पंचतत्व से जुड़ा है विसर्जन का भाव
बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र के प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, गणेशजी को पूरी सृष्टि के आधार के रूप में माना जाता है। मिट्टी की प्रतिमा का जल में विलीन होना प्रकृति में वापस लौटने के भाव से जुड़ा है।
गणपति अथर्वशीर्ष में गणेशजी को पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश यानी पंचतत्वों का स्वरूप बताया गया है।
विसर्जन के बाद मिट्टी से लगा सकते हैं पौधा
गणेश प्रतिमा के विसर्जन के बाद बची साफ मिट्टी का इस्तेमाल पौधा लगाने में किया जा सकता है। इसके लिए केवल दूर्वा या तुलसी का पौधा लगाना जरूरी नहीं है। गमले या बगीचे की जगह और जरूरत के अनुसार कोई अन्य पौधा भी लगाया जा सकता है।
जरूरत के मुताबिक इस मिट्टी में दूसरी मिट्टी भी मिलाई जा सकती है।
अच्छे संकल्प को जीवन में उतारने का संदेश
गणेश स्थापना के दौरान अच्छे काम करने और बुरी आदतें छोड़ने का संकल्प लिया जाता है। विशेषज्ञ के मुताबिक, विसर्जन के बाद भी इन संकल्पों को जीवन में बनाए रखना चाहिए।
गणेशजी को बुद्धि, विवेक और सही निर्णय के देवता माना जाता है। इसलिए गणेशोत्सव के दौरान लिए गए अच्छे संकल्पों को आगे भी निभाना पूजा की भावना को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने का एक तरीका माना गया है।
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