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सिगरेट के एक कश में 7 हजार से ज्यादा केमिकल, धूम्रपान से फेफड़ों की क्षमता पर पड़ता है असर

सिगरेट के धुएं में 7,000 से ज्यादा केमिकल, पैसिव स्मोकिंग भी खतरनाक; धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़ों में धीरे-धीरे शुरू होती है रिकवरी

नई दिल्ली। हमारे फेफड़े हर दिन करीब 20 हजार बार सांस लेकर शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। लेकिन सिगरेट का धुआं फेफड़ों की संरचना और उनकी कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक धूम्रपान करने से कई गंभीर बीमारियों और लंग कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ के अनुसार, ‘स्मोकर्स लंग्स’ कोई मेडिकल टर्म नहीं है। आम तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल लंबे समय तक धूम्रपान के प्रभाव से प्रभावित फेफड़ों के लिए किया जाता है। स्वस्थ फेफड़े अधिक साफ, लचीले और ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम होते हैं, जबकि लंबे समय तक धूम्रपान से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

धुएं में होते हैं 7 हजार से ज्यादा केमिकल

सिगरेट का धुआं सांस की नली से होते हुए फेफड़ों की सबसे छोटी वायु थैलियों यानी एल्वियोली तक पहुंच सकता है। इसमें 7,000 से ज्यादा केमिकल बताए गए हैं, जिनमें कई जहरीले और कैंसर पैदा करने वाले तत्व शामिल होते हैं।

धुएं में मौजूद टार फेफड़ों की सतह पर जमा हो सकता है। वहीं कार्बन मोनोऑक्साइड खून में पहुंचकर ऑक्सीजन की जगह लेती है। इसके अलावा धुएं में मौजूद रसायन फेफड़ों में जलन और सूजन पैदा कर सकते हैं।

सिर्फ फेफड़े ही नहीं, पूरे शरीर पर असर

धूम्रपान का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। धुएं के हानिकारक रसायन फेफड़ों के जरिए रक्त में पहुंचकर शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। इससे हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, मुंह और गले के कैंसर, आंखों की बीमारियों तथा दांत और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

पैसिव स्मोकिंग भी नुकसानदायक

दूसरे व्यक्ति की सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने को पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है। इससे भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में अस्थमा और फेफड़ों के विकास पर असर के अलावा लंग कैंसर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है।

गर्भावस्था के दौरान धुएं के संपर्क में आने से मां और शिशु पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

रोज 1-2 सिगरेट भी सुरक्षित नहीं

विशेषज्ञ के अनुसार रोजाना केवल 1-2 सिगरेट पीना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता। हर कश के साथ शरीर हानिकारक रसायनों के संपर्क में आता है। इसलिए धूम्रपान से होने वाले नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी तरीका इसे पूरी तरह छोड़ना है।

सिगरेट छोड़ने के बाद शरीर में शुरू होती है रिकवरी

धूम्रपान छोड़ने के बाद शरीर और फेफड़े धीरे-धीरे रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करते हैं। सामग्री के अनुसार:

  • 12 घंटे बाद: खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर सामान्य होने लगता है।
  • 48 घंटे बाद: शरीर से निकोटिन लगभग निकल जाता है और स्वाद व गंध महसूस करने की क्षमता बेहतर होने लगती है।
  • 3 दिन बाद: सांस लेना आसान लग सकता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार शुरू हो सकता है।
  • 3 महीने बाद: फेफड़े बेहतर तरीके से काम करने लग सकते हैं तथा खांसी और सांस फूलने की समस्या कम हो सकती है।
  • 1 साल बाद: धूम्रपान जारी रखने वालों की तुलना में हार्ट डिजीज का जोखिम लगभग आधा रह सकता है।

हालांकि, रिकवरी की गति हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। यह धूम्रपान की अवधि, मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।

फेफड़े पूरी तरह ठीक होंगे या नहीं?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि धूम्रपान से फेफड़ों को कितना नुकसान हुआ है। सिगरेट छोड़ने के बाद फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है और खांसी, बलगम तथा सांस से जुड़ी कुछ परेशानियां समय के साथ कम हो सकती हैं। हालांकि, लंबे समय तक धूम्रपान से हुए कुछ बदलाव स्थायी भी हो सकते हैं।

इसलिए जितनी जल्दी धूम्रपान छोड़ा जाए, फेफड़ों के स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही बेहतर रहती है।

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