हिमाचल में रिटायर्ड अफसर से ₹1.23 करोड़ की साइबर ठगी: ऑनलाइन निवेश में कई गुना मुनाफे का झांसा; रिश्तेदारों से भी लगवाए पैसे
डेढ़ महीने में 70 से ज्यादा ट्रांजेक्शन; फर्जी पोर्टल पर करोड़ों का मुनाफा दिखाकर निकासी रोकने का आरोप

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर में एक रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगों ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर 1 करोड़ 23 लाख 25 हजार रुपए की कथित ठगी कर ली। शिकायत के अनुसार, करीब डेढ़ महीने तक चले इस फर्जी निवेश के दौरान पीड़ित से 70 से अधिक बार अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ित के रिश्तेदारों को भी निवेश में पैसा लगाने के लिए तैयार किया। शिकायत मिलने के बाद धर्मशाला साइबर क्राइम पुलिस थाने में BNS और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फेसबुक के जरिए हुआ संपर्क
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने सबसे पहले फेसबुक के माध्यम से रिटायर्ड अधिकारी से संपर्क किया। उन्हें एक ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के बारे में बताया गया और कम समय में निवेश की रकम पर कई गुना रिटर्न मिलने का दावा किया गया।
इसके बाद पीड़ित को एक ऑनलाइन ग्रुप में जोड़ा गया। पुलिस शिकायत के मुताबिक, इस ग्रुप में ठगों के साथी भारी मुनाफे के स्क्रीनशॉट और निवेश से संबंधित संदेश साझा करते थे। इससे पीड़ित को प्लेटफॉर्म पर भरोसा होने लगा।
छोटी रकम से शुरू कराया निवेश
आरोपियों ने शुरुआत में कम रकम निवेश करवाई। फर्जी पोर्टल पर निवेश की रकम के साथ 5 से 10 हजार रुपए तक का मुनाफा दिखाया गया। शुरुआती दौर में रकम निकालने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। इससे प्लेटफॉर्म को लेकर पीड़ित का विश्वास और बढ़ गया।
इसके बाद आरोपियों ने धीरे-धीरे निवेश की रकम बढ़वानी शुरू कर दी। अलग-अलग समय पर पीड़ित से कई खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए जाते रहे और पोर्टल पर मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता रहा।
करोड़ों का मुनाफा दिखाकर निकासी रोकी
शिकायत के अनुसार, जब पीड़ित ने बड़ी रकम निवेश कर दी तो फर्जी पोर्टल पर उसका मुनाफा करोड़ों रुपए दिखाया गया। बाद में जब उसने रकम निकालने का प्रयास किया तो निकासी रोक दी गई।
इसके बाद आरोपियों ने टैक्स, शुल्क या अन्य बहानों से और रकम जमा कराने का दबाव बनाया। इसी दौरान पीड़ित को संदेह हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
तब तक वह स्वयं के साथ-साथ रिश्तेदारों से भी इस कथित निवेश योजना में बड़ी रकम लगवा चुका था। पुलिस अब बैंक खातों, ट्रांजेक्शन और आरोपियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।




