हिमाचल विधानसभा में संस्थान बंद करने पर CM-सुक्खू और जयराम ठाकुर आमने-सामने
नीड बेस्ड संस्थान खोलने को लेकर सरकार का पक्ष, विपक्ष ने बंद किए संस्थानों को फिर शुरू करने की मांग उठाई; सदन में छह विधेयक भी पेश

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को सरकारी संस्थानों को बंद करने और नए संस्थान खोलने के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच कई बार नोकझोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा और बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यकाल के दौरान बंद किए गए और नए खोले गए सरकारी संस्थानों का ब्यौरा मांगा। इसी दौरान भाजपा विधायक हंस राज समेत अन्य सदस्यों ने अनुपूरक सवाल पूछे, जिसके बाद सदन में माहौल कई बार गरमा गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य में जहां भी संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां नीड बेस्ड आधार पर संस्थान खोले जाएंगे और उनके लिए आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से कई संस्थान खोलने की घोषणाएं की थीं, लेकिन उन संस्थानों के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल संस्थान खोल देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां आवश्यक सुविधाएं और स्टाफ उपलब्ध होना भी जरूरी है। इसके जवाब में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से संस्थान बंद करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन संस्थानों को बंद किया गया था, उनमें से कितने संस्थानों को सरकार ने दोबारा शुरू किया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार के पिछले पांच वर्षों के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थानों को लेकर सरकार को नियमों और जरूरत के आधार पर फैसले लेने चाहिए। मुख्यमंत्री ने संस्थानों को बंद किए जाने के पीछे नीतिगत कारणों का हवाला देते हुए कहा कि फैसले किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड को इसी तरह की गंभीर अनियमितताओं के कारण बंद करना पड़ा था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से सवाल किया कि यदि भाजपा सरकार के समय बड़ी संख्या में संस्थान खोले गए थे तो उनके लिए पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। दूसरी ओर जयराम ठाकुर ने कहा कि संस्थान खोलना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है और सरकार को जनहित तथा आवश्यकता के अनुसार निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनगणना पूरी होने के बाद जरूरत के आधार पर संस्थानों को अधिसूचित किया जा सकता है। संस्थानों को लेकर हुई इस बहस के बीच विधानसभा में सरकार की ओर से छह विधेयक भी प्रस्तुत किए गए। इनमें हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों और पैदल चलने वालों के लिए संशोधन विधेयक, हिमाचल प्रदेश माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक, हिमाचल प्रदेश युद्ध पुरस्कार विधेयक, भारतीय स्टाम्प विधेयक और हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज द्वितीय संशोधन विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों पर सदन में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मंगलवार की कार्यवाही में संस्थानों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस से साफ रहा कि हिमाचल में सरकारी संस्थानों की उपयोगिता, स्टाफ व्यवस्था और उन्हें बंद या दोबारा खोलने का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना हुआ है।




