झारखंड में केंद्रीय सहायता का संकट: 18,274 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 5 महीने में मिले सिर्फ 1,226 करोड़, कई विभागों ने नहीं भेजी रिपोर्ट
2026-27 में केंद्र से ₹18,274 करोड़ मिलने का लक्ष्य, 31 अगस्त तक सिर्फ 6.7% राशि आई; एक दर्जन से अधिक विभागों ने मांगी गई रिपोर्ट नहीं भेजी, योजना बजट का 23% ही खर्च

रांची। झारखंड को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार से मिलने वाली केंद्रीय सहायता की रफ्तार धीमी है। 31 अगस्त तक राज्य को निर्धारित ₹18,274 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ ₹1,226 करोड़ मिले हैं। यह कुल लक्ष्य का करीब 6.7 प्रतिशत है।
केंद्रीय सहायता से जुड़ी राशि प्राप्त करने के लिए राज्य के विभागों को योजनाओं की प्रगति, उपयोगिता और राशि की जरूरत से संबंधित रिपोर्ट भेजनी थी। योजना एवं विकास विभाग की ओर से जानकारी मांगे जाने और 18 सितंबर तक की विस्तारित समय-सीमा दिए जाने के बावजूद एक दर्जन से अधिक विभागों ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है।
स्रोत के अनुसार, ग्रामीण कार्य, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और भवन निर्माण विभाग ने अपनी रिपोर्ट भेजी है। अन्य विभागों की रिपोर्ट नहीं मिलने से केंद्र के समक्ष राशि के दावे की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई है।
बजट और खर्च की स्थिति
झारखंड का मूल बजट ₹1,58,560 करोड़ का है, जबकि अनुपूरक बजट ₹8,399 करोड़ का है। ₹1,00,891 करोड़ के योजना बजट के मुकाबले शुरुआती पांच महीनों में ₹23,212 करोड़ खर्च हुए हैं, जो करीब 23 प्रतिशत है।
वहीं, राज्य ने आंतरिक राजस्व संग्रह के लिए ₹1,36,210 करोड़ का वार्षिक लक्ष्य तय किया है। 31 अगस्त तक इसमें से ₹43,808 करोड़ की वसूली हुई है, जो करीब 32 प्रतिशत है।
पिछले वित्तीय वर्ष में भी लक्ष्य से कम मिली सहायता
स्रोत के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्र से करीब ₹17,000 करोड़ की केंद्रीय सहायता का लक्ष्य था, लेकिन लगभग ₹11,000 करोड़ ही प्राप्त हो सके थे। रिपोर्ट में पिछले 10 वर्षों के दौरान केंद्रीय सहायता में कमी का रुझान होने का भी उल्लेख किया गया है।
कई योजनाओं पर असर का दावा
रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय सहायता में देरी और राज्य के आंतरिक संसाधनों की धीमी प्रगति का असर विभिन्न विभागों की योजनाओं पर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख किया गया है। स्कूली शिक्षा विभाग में मुफ्त पोशाक और मिड-डे मील जैसी योजनाएं प्रभावित होने की बात कही गई है।
ग्रामीण कार्य विभाग की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जल जीवन मिशन परियोजनाएं और कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाएं भी प्रभावित होने का दावा रिपोर्ट में किया गया है।
इसके अलावा मनरेगा मजदूरी, पारा शिक्षकों का मानदेय, छात्रवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वच्छ भारत मिशन, पुलिस आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों पर भी वित्तीय दबाव का असर बताया गया है।




