LNJP के 225 करोड़ के नए भवन के हैंडओवर पर विवाद: ठेकेदार ने AC-शौचालयों में ताला लगाया, प्रबंधन बोला- अधूरे भवन की जिम्मेदारी कैसे लें?
225 करोड़ की लागत से बने 400 बेड के भवन में अभी संसाधन और स्टाफ की कमी; BMSCIL ने तीन महीने में व्यवस्थाएं पूरी करने का भरोसा दिया

पटना। लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) के 400 बेड वाले नए सुपर स्पेशियलिटी भवन के हैंडओवर को लेकर अस्पताल प्रबंधन और निर्माण एजेंसी के बीच विवाद सामने आया है। करीब 225 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस भवन को अस्पताल प्रबंधन ने अधूरा बताते हुए हैंडओवर लेने से इनकार किया है।
आरोप है कि भवन निर्माण से जुड़े ठेकेदार अंबुज सिंह ने नए भवन के गेट, एसी और शौचालयों में ताले लगा दिए। इसके चलते सोमवार को नए भवन में संचालित ओपीडी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी सेवाएं प्रभावित हुईं। मरीजों को वापस पुराने भवन में भेजना पड़ा।
प्रबंधन का सवाल- अधूरे भवन की जिम्मेदारी कैसे लें?
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नए भवन में अभी कई काम पूरे होने बाकी हैं। जरूरी उपकरण, संसाधन और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने इस संबंध में बिहार मेडिकल सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSCIL) को पत्र भेजा है। पत्र में ठेकेदार पर दबाव बनाने, धमकी देने और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।
प्रबंधन के मुताबिक, भवन की जिम्मेदारी लेने के बाद यदि कोई उपकरण खराब होता है, सामान चोरी होता है या तकनीकी समस्या आती है तो उसकी जवाबदेही अस्पताल पर आ सकती है। इसलिए पर्याप्त मानवबल, सुरक्षा और संसाधनों के बिना हैंडओवर लेना उचित नहीं माना गया।
18 सितंबर को हुई थी हैंडओवर को लेकर बातचीत
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 18 सितंबर की शाम करीब 4 बजे ठेकेदार निदेशक कक्ष पहुंचे और नए भवन का हैंडओवर लेने का दबाव बनाया। निदेशक ने पर्याप्त मैनपावर और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए तत्काल हैंडओवर लेने में असमर्थता जताई।
प्रबंधन का आरोप है कि इसके बाद ठेकेदार की ओर से भवन खाली करने का दबाव बनाया गया और बिजली-पानी बंद करने की धमकी दी गई।
AC और शौचालयों में ताला लगाने का आरोप
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, विवाद के अगले दिन 19 सितंबर को नए भवन का एसी बंद कर दिया गया। पुरुष, महिला और दिव्यांग शौचालयों में भी ताले लगा दिए गए।
बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होने के बाद नए भवन में चल रही ओपीडी, फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी सेवाओं को पुराने भवन में शिफ्ट करना पड़ा। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पार्किंग को लेकर भी विवाद
सोमवार को नए भवन में सेवाएं प्रभावित होने के साथ पार्किंग को लेकर भी स्थिति बिगड़ी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मरीजों के परिजनों और डॉक्टरों की गाड़ियों को पार्किंग से हटाया गया और परिसर में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई।
BMSCIL के MD ने तीन महीने में व्यवस्था का भरोसा दिया
विवाद की जानकारी मिलने के बाद BMSCIL के एमडी सुब्रत दास और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी सोमवार शाम LNJP पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार से बातचीत कर विवाद सुलझाने का प्रयास किया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, बैठक में BMSCIL की ओर से अगले तीन महीने में जरूरी संसाधन और व्यवस्थाएं चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। इसके बाद नए भवन में सेवाएं धीरे-धीरे शुरू करने पर सहमति बनी।
400 बेड के लिए मैनपावर भी बड़ी चुनौती
नए भवन को पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए पर्याप्त मानवबल की कमी भी सामने आ रही है। अस्पताल के प्रस्ताव के अनुसार 400 बेड के लिए 269 डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि 101 पद ही स्वीकृत हैं। इस हिसाब से 168 डॉक्टरों की कमी बताई गई है।
इसी तरह 219 ग्रेड-ए नर्सों की जरूरत के मुकाबले 88 पद स्वीकृत हैं। यानी 131 नर्सों की कमी है। वार्ड अटेंडेंट, फार्मासिस्ट, टेक्नीशियन और अन्य सपोर्ट स्टाफ की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है।
अब सवाल यह है कि 400 बेड का नया भवन तैयार होने के बावजूद पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, उपकरण और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के बिना यहां पूरी क्षमता से स्वास्थ्य सेवाएं कब शुरू हो पाएंगी।




