न्यायिक शिक्षा पर दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस शुरू: जस्टिस मिश्रा बोले- डीपफेक के दौर में असली-नकली की पहचान चुनौती, जजों को बढ़ानी होगी समझ
ग्वालियर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में न्यायिक शिक्षा और तकनीकी बदलाव पर चर्चा; जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने डीपफेक और डिजिटल साक्ष्यों को नई चुनौती बताया, AI, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा पर भी मंथन

ग्वालियर। न्यायिक शिक्षा और बदलती तकनीक से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के लिए ग्वालियर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित सम्मेलन में न्यायिक प्रशिक्षण, डिजिटल साक्ष्य, साइबर अपराध और नई तकनीकों के न्याय व्यवस्था पर प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
डीपफेक और डिजिटल तकनीक नई चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि डीपफेक और डिजिटल साधनों के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में असली और नकली सामग्री की पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है। तकनीक के इस्तेमाल से अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं, ऐसे में न्यायपालिका के सामने नए तरह के कानूनी सवाल आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश और समाज के सामने आने वाली नई और जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए न्यायपालिका को लगातार अपनी समझ और ज्ञान का विस्तार करना होगा। हर नई चुनौती के लिए नए कानून का इंतजार नहीं किया जा सकता, बल्कि मौजूदा कानूनों की बदलती परिस्थितियों के अनुसार व्याख्या करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
वरिष्ठ और युवा जजों के बीच सीखने पर जोर
नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने न्यायिक प्रशिक्षण में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया दोतरफा होनी चाहिए। वरिष्ठ न्यायाधीश युवा जजों से आधुनिक तकनीक सीख सकते हैं, जबकि युवा जज वरिष्ठों के अनुभव से कानून की बारीकियां समझ सकते हैं।
AI, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा पर चर्चा
मप्र हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा कि न्यायिक कौशल जन्मजात नहीं होता, बल्कि निरंतर सीखने और अभ्यास से विकसित होता है। उन्होंने न्याय व्यवस्था में AI और IT के उपयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि न्यायिक शिक्षा न्यायाधीश के पद की शपथ लेने के साथ शुरू होने वाली निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने नए कानूनों, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर न्यायाधीशों को लगातार अपडेट रहने की आवश्यकता बताई।
चार राज्यों के न्यायाधीश हुए शामिल
सम्मेलन का आयोजन नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट और मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के न्यायाधीश भी शामिल हुए।




