PGI चंडीगढ़ में रेजिडेंट डॉक्टरों के तनाव पर होगा नियमित संवाद, डायरेक्टर ने की पहल
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चंडीगढ़, 27 सितंबर। चंडीगढ़ स्थित पीजीआई (PGI) में काम के दबाव, तनाव और बर्नआउट से जूझ रहे रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थान ने नियमित संवाद की पहल की है। पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ तय समय पर बैठकें करने और उनकी समस्याओं को सीधे सुनने की व्यवस्था को संस्थागत रूप देने की घोषणा की है। साथ ही विभागाध्यक्षों और फैकल्टी गाइड्स को भी रेजिडेंट्स से नियमित बातचीत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीजीआई में आयोजित ओरिएंटेशन एवं वेल-बीइंग कार्यक्रम में करीब 200 रेजिडेंट डॉक्टरों ने डायरेक्टर के साथ संवाद किया। इस दौरान डॉक्टरों ने काम के दबाव, तनाव, बर्नआउट, पीयर सपोर्ट और रेजिडेंट वेलफेयर से जुड़े मुद्दों पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने पर जोर
प्रो. विवेक लाल ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टरों का कल्याण मरीजों की बेहतर देखभाल का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने और समय रहते समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अपनी रेजिडेंसी के अनुभव भी साझा किए और कहा कि युवा डॉक्टरों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी चिंताएं सामने रख सकें।
साप्ताहिक अवकाश और 24 घंटे आराम की मांग
कार्यक्रम में एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (ARD) के अध्यक्ष डॉ. विष्णु जिंजा ने रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से साप्ताहिक अवकाश और नाइट ड्यूटी के बाद 24 घंटे के आराम की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त आराम से डॉक्टरों की थकान और तनाव कम करने के साथ मरीजों की सुरक्षा में भी मदद मिल सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर चर्चा
पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. शुभ मोहन सिंह ने रेजिडेंसी के दौरान होने वाले मानसिक और भावनात्मक बदलावों पर चर्चा की। वहीं, डॉ. निधि चौहान ने तनाव के शुरुआती लक्षण पहचानने, समय पर मदद लेने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता बताई।
पीजीआई के डीन (एकेडमिक्स) प्रो. संजय जैन ने कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी केवल अकादमिक और क्लीनिकल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए स्वस्थ और सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
उपशीर्षक: काम के दबाव और बर्नआउट से जूझ रहे डॉक्टरों की समस्याएं सीधे सुनेंगे PGI डायरेक्टर, विभागाध्यक्षों को भी नियमित संवाद के निर्देश




