पश्चिम बंगाल में चर्च और प्रार्थना सभाओं पर हमलों के आरोप: ईसाई संगठन ने 2 महीने में 22 मामले बताए
कई जगह प्रार्थना सभाएं बंद, कुछ पास्टर्स ने ऑनलाइन प्रेयर शुरू की; विरोध करने वालों का आरोप—प्रार्थना की आड़ में धर्मांतरण की कोशिश

पश्चिम बंगाल में चर्च और प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईसाई संगठनों का दावा है कि पिछले दो महीनों में चर्च, हाउस चर्च और प्रार्थना सभाओं से जुड़े 22 विरोध या हमले के मामले सामने आए हैं। संगठन के मुताबिक, इनमें से 9 मामलों में FIR दर्ज हुई है।
इन घटनाओं में शामिल लोगों की ओर से मुख्य आरोप धर्मांतरण से जुड़े हैं। वहीं, ईसाई संगठनों और संबंधित पास्टर्स का कहना है कि कई जगह प्रार्थना सभाओं को रोकने के लिए भीड़ ने विरोध और तोड़फोड़ की।
दांतन में प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा
13 सितंबर को पश्चिम मेदिनीपुर के दांतन में एक घर में प्रार्थना सभा चल रही थी। आरोप है कि करीब 40-45 लोग वहां पहुंचे और प्रार्थना रोकने को कहा। इस दौरान महिलाओं से बदसलूकी और घर में तोड़फोड़ के आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस घटना को लेकर FIR दर्ज की गई है और चर्च की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच चल रही है। फिलहाल किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।
बर्णपुर में विरोध के बाद ऑनलाइन प्रेयर
7 जून को पश्चिम बर्धमान के बर्णपुर में एक हॉल में करीब 60-70 लोग रविवार की प्रार्थना के लिए जुटे थे। पास्टर साएन सेनगुप्ता के मुताबिक, दो युवक सभा में आए और वीडियो बनाने लगे। बाद में कुछ अन्य लोग भी वहां पहुंचे और धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए विरोध किया।
पास्टर का आरोप है कि भीड़ में कुछ लोगों ने उन्हें मारने की बात कही। पुलिस उन्हें हीरापुर थाने ले गई, जहां वे रात तक रहे। इस मामले में पास्टर ने FIR दर्ज नहीं कराई।
घटना के बाद वहां रविवार की सामूहिक प्रार्थना बंद कर दी गई। अब प्रार्थना ऑनलाइन की जा रही है। पास्टर के मुताबिक, इससे मोबाइल या इंटरनेट की सुविधा नहीं रखने वाले लोग प्रार्थना में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
कुछ संगठनों का आरोप—धर्मांतरण के खिलाफ विरोध
विरोध करने वाले हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका विरोध ईसाई धर्म मानने वालों से नहीं, बल्कि कथित जबरन या लालच देकर धर्मांतरण से है।
बर्णपुर मामले में सामने आए उज्ज्वल मोदक ने आरोप लगाया कि प्रार्थना सभा में लोगों को बीमारी ठीक होने जैसे दावे बताए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से ईसाई धर्म अपनाता है तो उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन पैसे या अन्य लालच के जरिए धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों का वे विरोध करेंगे।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
जामुरिया में भी प्रार्थना के दौरान पहुंची भीड़
पश्चिम बर्धमान के जामुरिया में 28 जून को प्रार्थना सभा के दौरान 10-15 लोगों के पहुंचने और धर्मांतरण का आरोप लगाकर विरोध करने की बात सामने आई। पुलिस के पहुंचने के बाद प्रार्थना दोबारा शुरू हुई।
स्थानीय पास्टर के अनुसार, इस घटना के बाद वे कुछ समय के लिए इलाके से बाहर चले गए। उन्होंने FIR दर्ज नहीं कराई।
मकान मालिक और हॉल संचालक भी चिंतित
लगातार विरोध की घटनाओं के बाद कुछ जगहों पर प्रार्थना सभाओं के लिए किराए पर जगह मिलने में भी परेशानी की बात सामने आई है। आसनसोल में एक मैरिज हॉल में लंबे समय से रविवार की प्रार्थना सभा होती थी। लेकिन हालिया घटनाओं के बाद संचालक ने सुरक्षा और संपत्ति के नुकसान की आशंका जताते हुए जगह देने से इनकार कर दिया।
कुछ ईसाई संगठनों ने ऐसे माहौल में पास्टर्स को ऑनलाइन हाउस चर्च और प्रार्थना सभाएं आयोजित करने की सलाह दी है।
ईसाई संगठन ने 22 मामलों का दावा किया
बंगिया ख्रिष्टन परिषद के जनरल सेक्रेटरी हैरद मल्लिक के मुताबिक, पिछले दो महीनों में 22 मामले सामने आए हैं। उनका दावा है कि इनमें सिर्फ 9 मामलों में FIR दर्ज हुई। इनमें दो FIR पास्टर्स के खिलाफ और सात हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों के खिलाफ होने की बात कही गई है।
मल्लिक के मुताबिक, कई इलाकों में चर्च की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण घरों, कम्युनिटी हॉल और मैरिज हॉल में प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं। उनका आरोप है कि इन्हीं सभाओं को धर्मांतरण का नाम देकर निशाना बनाया जा रहा है।
सरकार को शिकायत मिलने पर कार्रवाई का भरोसा
दैनिक भास्कर के मुताबिक, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि उनके कार्यालय को अब तक ऐसी घटनाओं की शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
मामलों की जांच के दौरान यह अलग-अलग निर्धारित किया जाना महत्वपूर्ण है कि किन घटनाओं में वास्तव में हिंसा या संपत्ति को नुकसान हुआ, किन मामलों में केवल विरोध या विवाद हुआ और धर्मांतरण से जुड़े आरोपों के समर्थन में क्या प्रमाण सामने आए हैं।
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