आकृति कक्कड़ बोलीं- गणपति बप्पा घर आते हैं, जाते नहीं: विसर्जन के बाद पौधों के जरिए बन जाते हैं जिंदगी का हिस्सा
सिंगर ने बताया गणपति उत्सव का अनुभव; इको-फ्रेंडली मूर्ति का घर पर विसर्जन कर मिट्टी में बीज डालकर उगाती हैं पौधे, मां की सेहत ठीक होने पर इस बार रखी आभार की थीम

गणेश उत्सव के दौरान सिंगर आकृति कक्कड़ ने अपने परिवार की आस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहल के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि शादी के बाद से वह और उनके पति हर साल घर में गणपति बप्पा को विराजमान करते हैं। इस बार उनकी गणपति पूजा की थीम मां की तबीयत ठीक होने पर भगवान के प्रति आभार जताना है।
आकृति के मुताबिक, गणपति उत्सव उनके लिए केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि परिवार के साथ खुशियां और भावनाएं साझा करने का अवसर है।
शादी के बाद शुरू की घर में गणपति लाने की परंपरा
आकृति ने बताया कि शादी के समय उन्होंने और उनके पति ने तय किया था कि वे हर साल घर में गणपति बप्पा को विराजमान करेंगे। इस बार उनके घर गणपति उत्सव का 11वां साल है।
दिल्ली में पली-बढ़ी आकृति ने बताया कि वहां उन्होंने जन्माष्टमी जैसे त्योहार ज्यादा देखे थे। मुंबई आने के बाद गणेश उत्सव को करीब से जानने का मौका मिला।
उन्होंने कहा कि उनके लिए बप्पा का घर आना परिवार के लिए खुशी और सकारात्मक भावनाओं से जुड़ा अनुभव है।
‘मेरे लिए गणपति उत्सव का महत्व बहुत ज्यादा है’
आकृति ने बताया कि गणपति बप्पा के घर आने के बाद पूरे परिवार का माहौल बदल जाता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए इस उत्सव का महत्व बेहद खास है।
उनके अनुसार, गणपति बप्पा का घर आना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने और आस्था को महसूस करने का अवसर भी है।
इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का करती हैं विसर्जन
आकृति पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ट्री गणेशा की प्रतिमा घर लाती हैं। वह प्रतिमा का विसर्जन घर पर ही पानी के ड्रम में करती हैं।
मूर्ति की मिट्टी पानी में घुलने के बाद उसमें बीज डालकर पौधे उगाए जाते हैं। आकृति का कहना है कि गणपति बप्पा घर आते हैं, लेकिन उनके लिए जाते नहीं हैं। पौधों के रूप में वे फिर उनके जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।
आकृति के मुताबिक, आस्था से जुड़े आयोजनों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सात साल से मौजूदा घर में मना रही हैं गणेश उत्सव
आकृति ने बताया कि वह पिछले सात साल से अपने मौजूदा घर में गणपति उत्सव मना रही हैं। इससे पहले शादी के बाद मलाड में रहते हुए उन्होंने इस परंपरा की शुरुआत की थी।
शुरुआती वर्षों में परिवार के सदस्य मिलकर घर की सजावट करते थे। उनकी मां भी सजावट को लेकर काफी क्रिएटिव रही हैं। तीन दिन के उत्सव के लिए परिवार फूलों की अलग-अलग सजावट और थीम तैयार करता था।
मां की सेहत ठीक होने पर इस बार रखी ‘ग्रैटिट्यूड’ थीम
इस बार गणपति उत्सव की थीम ग्रैटिट्यूड यानी आभार पर आधारित है। आकृति ने बताया कि काफी समय से उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन गणपति बप्पा के आगमन से दो दिन पहले उनकी तबीयत ठीक हो गई।
इसी वजह से इस बार उन्होंने बप्पा के प्रति आभार जताने को उत्सव की थीम बनाया।
परिवार की सेहत और दूसरों की मदद करने की मांगी शक्ति
आकृति ने बताया कि गणपति बप्पा से उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना परिवार के सभी सदस्यों की अच्छी सेहत के लिए है।
इसके साथ ही वह खुद को इतना सक्षम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं कि जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि जिंदगी में जो चीजें उन्हें खुशी देती हैं और लोगों से जोड़कर रखती हैं, उनके लिए भी वह बप्पा का आशीर्वाद चाहती हैं।
‘बिग बैंड थ्योरी’ के सीजन 3 की तैयारी में जुटी हैं
अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में आकृति ने बताया कि वह इन दिनों ‘बिग बैंड थ्योरी’ के सीजन 3 की तैयारियों में व्यस्त हैं। उनके मुताबिक इसकी तैयारियां चल रही हैं और अक्टूबर के अंत में दर्शक इस प्रोजेक्ट को सुन और देख पाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कई नए कोलैबोरेशन भी हैं और उन्हें उम्मीद है कि दर्शकों को यह पसंद आएगा।
लता मंगेशकर और आशा भोसले से मिली संगीत की प्रेरणा
आकृति ने अपनी संगीत यात्रा में लता मंगेशकर और आशा भोसले के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी संगीत की परवरिश में इन महान गायिकाओं का बड़ा प्रभाव रहा है।
उनके मुताबिक, उनके पसंदीदा गीतों और संगीत की समझ में पुराने दौर के इन कलाकारों की आवाज और गायकी की छाप रही है।
‘गणेशा गणेशा’ भजन आज भी सोशल मीडिया पर चर्चा में
गणपति बप्पा के लिए आकृति ने अपना भजन ‘गणेशा गणेशा’ भी सुनाया। उन्होंने बताया कि यह भजन करीब दो साल पहले बनाया गया था और हाल में उन्हें पता चला कि यह इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फिर से ट्रेंड कर रहा है।
आकृति ने कहा कि उनके फैन क्लब उन्हें सोशल मीडिया पर गाने की लोकप्रियता से जुड़ी जानकारी देते रहते हैं।
‘सैटरडे-सैटरडे’ और ‘इस्की उसकी’ से मिली पहचान
आकृति कक्कड़ ने बॉलीवुड के साथ-साथ स्वतंत्र संगीत में भी काम किया है। उन्होंने फिल्म ‘दस’ के गाने ‘छम से वो आ जाए’ से प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की थी।
इसके बाद उन्होंने ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’ के ‘सैटरडे-सैटरडे’, ‘2 स्टेट्स’ के ‘इस्की उसकी’, ‘बिल्लू’ के ‘मरजानी’ और ‘खुदा या खैर’, ‘जॉनी गद्दार’ के टाइटल ट्रैक, ‘नमस्ते लंदन’ के ‘आनन फानन’ और ‘वेलकम’ के ‘इंशाअल्लाह’ जैसे गानों में अपनी आवाज दी।
2010 में उन्होंने शंकर महादेवन के साथ अपना सोलो एल्बम ‘आकृति’ रिलीज किया था। वह लाइव परफॉर्मर के तौर पर भी सक्रिय रही हैं और जी बांग्ला के ‘सा रे गा मा पा: लिटिल चैंप्स’ में जज की भूमिका निभा चुकी हैं।
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