शाही मस्जिद विवाद से व्यापार प्रभावित, 3 करोड़ रुपये के कारोबार पर पड़ा असर
क्षेत्र बंद रहने से व्यापारियों को नुकसान, सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने 5 हजार लोगों तक पहुंचाया पोहा और चाय

उज्जैन। शाही मस्जिद विवाद के चलते सोमवार को शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में कारोबार प्रभावित रहा। पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, छत्री चौक और छोटा सराफा जैसे इलाकों में आम दिनों के साथ-साथ पर्व-त्योहारों पर भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। यहां सोना-चांदी, पूजन सामग्री, वैवाहिक सामान, साड़ियां, रेडीमेड कपड़े, मिठाई और नमकीन का कारोबार होता है। सोमवार को क्षेत्र में कारोबार बंद रहने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवनारायण सोनी के अनुसार, सराफा क्षेत्र में करीब 90 व्यापारी हैं और यहां प्रतिदिन औसतन 2 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। वहीं, छोटा सराफा के व्यापारी संजय मेहता के मुताबिक, इस क्षेत्र में सामान्य दिनों में 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का कारोबार होता है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में एक दिन में करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
कारोबार बंद रहा, लेकिन सेवा जारी रखी
सराफा व्यापारी एसोसिएशन की यूथ एसोसिएशन ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए जलपान की व्यवस्था की। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत सोनी ने बताया कि कारोबार बंद होने के बावजूद युवाओं ने सेवा का काम जारी रखा। सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक पुलिसकर्मियों को पोहे और चाय उपलब्ध कराई गई।
युवाओं ने अपने स्तर पर पोहे, चाय, चीनी और बर्तनों की व्यवस्था की थी। एसोसिएशन के अनुसार, इस दौरान करीब 5 हजार लोगों तक पोहे और चाय पहुंचाई गई।
1925 के दस्तावेज में मस्जिद का उल्लेख होने का दावा
शाही मस्जिद के इतिहास को लेकर मौलाना इब्राहिम ने बताया कि सिंधिया राजघराने के वर्ष 1925 के एक पत्र में मस्जिद का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार, पत्र में जमीन अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने की बात दर्ज थी।
मौलाना ने बताया कि वर्ष 1975 में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था के लिए मस्जिद की कुछ जमीन दी गई थी। उन्होंने 1985 के सरकारी राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी नपाई का उल्लेख होने की बात कही। मौलाना इब्राहिम के अनुसार, मस्जिद का निर्माण वर्ष 1390 ईस्वी में हुआ था। वे पिछले 28 वर्षों से यहां नमाज अदा करवा रहे हैं।
व्यापार और ऐतिहासिक दावों का मामला
शाही मस्जिद के आसपास के क्षेत्र में कारोबार बंद रहने से व्यापारियों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। वहीं, मस्जिद के इतिहास और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर मौलाना की ओर से किए गए दावे भी चर्चा में हैं।




