रांची

झारखंड में 42,664 सहियाओं को मिलेंगे टैब, तीन साल की देरी से बढ़ी लागत

10 हजार का टैब अब 18 हजार रुपये में खरीदने की तैयारी, 114.25 करोड़ रुपये की योजना पर उठे सवाल

रांची। झारखंड में ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी 42,664 सहियाओं और स्वास्थ्य कर्मियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना करीब तीन साल की देरी के बाद आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वीकृत 114.25 करोड़ रुपये की राशि से अब नए सिरे से टैब खरीदने की तैयारी है। हालांकि, देरी के कारण टैब की कीमत बढ़ने और सेवाओं की अवधि घटने का मुद्दा सामने आया है।

विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से खरीद के लिए मंजूरी मिलने के बाद झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से निविदा या जेम पोर्टल पर खरीद प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

2023 में मिली थी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2023 को 39,964 ग्रामीण सहियाओं, 2,500 शहरी सहियाओं और 200 एनईएलपी फैमिली वेलफेयर कर्मियों के लिए टैब खरीदने की मंजूरी दी थी। इसके लिए 114.25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इसके बावजूद राशि लंबे समय तक खर्च नहीं हो सकी।

अब उसी बजट में नए तकनीकी मानकों के अनुसार खरीद की तैयारी है। लेकिन इस दौरान लागत और सेवाओं की शर्तों में बदलाव हुआ है।

टैब की कीमत में 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी

पुरानी योजना में प्रति टैब की कीमत करीब 10 हजार रुपये निर्धारित थी, जबकि नए प्रस्ताव में यह खर्च बढ़कर 18 हजार रुपये हो गया है। यानी टैब की कीमत में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसके साथ ही सिम और इंटरनेट की अवधि 60 महीने से घटाकर 30 महीने कर दी गई है। बीमा कवरेज की अवधि भी पांच साल से घटाकर ढाई साल की गई है। वहीं, एमडीएम सॉफ्टवेयर की लागत 600 रुपये से बढ़कर 1,200 रुपये बताई गई है।

योजना के आंकड़ों के अनुसार, प्रति सहिया कुल खर्च पहले 26,780 रुपये था, जबकि नए प्रस्ताव में यह 26,778 रुपये है। यानी लगभग समान खर्च में सेवाओं की अवधि कम हो गई है।

तकनीकी मानकों में बदलाव के बाद तैयार हुआ नया प्रस्ताव

टैब के तकनीकी मानकों को अंतिम रूप देने के लिए विभागीय स्तर पर कई चरणों में विचार-विमर्श किया गया। 18 सितंबर 2023 को तकनीकी मानकों के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए समिति गठित की गई। इसके बाद तकनीकी जरूरतों में बदलाव को देखते हुए 11 सितंबर 2025 को फिर समिति बनाई गई।

नए मानकों के आधार पर अब खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

अब आपूर्ति और वितरण पर नजर

अब निविदा प्रक्रिया, आपूर्तिकर्ता के चयन, टैब की आपूर्ति और सहियाओं तक वितरण की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि सभी लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप टैब मिलें और सिम, इंटरनेट, सॉफ्टवेयर तथा बीमा की सेवाएं तय अवधि तक उपलब्ध रहें।

तीन साल की देरी के बाद शुरू हो रही इस योजना में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ी हुई लागत के बावजूद सहियाओं को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कितनी प्रभावी सुविधा मिल पाएगी।

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