बिहार में गंगा उफान पर, 18 जिलों में बाढ़; 6.65 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
बक्सर से भागलपुर तक गंगा लाल निशान के ऊपर, पटना में गांधी घाट पर रिकॉर्ड जलस्तर; पुनपुन नदी 2.75 मीटर ऊपर, रेल और सड़क यातायात प्रभावित

बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर और बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य के 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और इन इलाकों में 6.65 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बक्सर से लेकर भागलपुर तक गंगा नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि पुनपुन नदी के उफान ने पटना और आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर शनिवार को 50.57 मीटर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पुराने अधिकतम स्तर से भी ऊपर बताया जा रहा है। दूसरी ओर पुनपुन नदी खतरे के निशान से करीब 2.75 मीटर ऊपर बह रही है, जिसके कारण पटना के दक्षिणी हिस्सों में कई जगह सुरक्षा बांध प्रभावित हुए हैं और कुछ स्थानों पर पानी ओवरफ्लो होकर रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बाढ़ के पानी का असर पटना-गया रेलखंड और मोकामा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी दिखाई दे रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। दानापुर के दियारा क्षेत्र के हेतनपुर में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक सूअर के हमले में 7 वर्षीय बच्ची की मौत की घटना भी सामने आई है। इस घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। राज्य में मौसम भी लगातार सक्रिय बना हुआ है और मौसम विज्ञान केंद्र ने रविवार को चार जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जबकि करीब 20 जिलों के लिए बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। उत्तर और पूर्वी बिहार के कई हिस्सों में बारिश की संभावना है, जिसमें पश्चिम चंपारण से लेकर किशनगंज और अररिया तक के इलाके शामिल हैं, जबकि पटना, भोजपुर, बक्सर, गया, नालंदा और औरंगाबाद सहित दक्षिण बिहार के कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। पटना में अगले चार दिनों तक बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना बताई गई है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में भी राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। सीवान के नौतन में 80.8 मिलीमीटर और गोरखटी में 80.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि भगवानपुर हाट में 78.6, औरंगाबाद के ओबरा में 64.2 और मधेपुरा में 57.5 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। मुरलीगंज, रेविलगंज, बसंतपुर और दिघवारा में भी 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राज्य की नौ नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और पुनपुन नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में करीब 28 सेंटीमीटर बढ़ा है। श्रीपालपुर में पुनपुन का जलस्तर लाल निशान से 2.57 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पटना-गया रेल मार्ग पर भी असर पड़ा है और पूर्व मध्य रेलवे ने सुरक्षा को देखते हुए कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। पटना से चलने वाली 13330 और धनबाद से चलने वाली 13329 गंगा-दामोदर एक्सप्रेस को फतुहा, इस्लामपुर और तिलैया के रास्ते चलाने का फैसला किया गया है, जबकि राजगीर-बनारस के बीच चलने वाली 15138 और 15137 बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस को पटना से आरा और बक्सर के रास्ते संचालित किया जा रहा है। पटना-गया रेलखंड से गुजरने वाली अन्य कई ट्रेनें भी तीन से चार घंटे की देरी से चल रही हैं। रेलवे के अनुसार जलस्तर सामान्य होने के बाद प्रभावित रेल ट्रैक और पुलों की सुरक्षा जांच की जाएगी और पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही सामान्य परिचालन बहाल किया जाएगा। राज्य के अलग-अलग जिलों में भी बाढ़ का असर तेजी से बढ़ रहा है। बेगूसराय में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण नए इलाकों में पानी प्रवेश कर रहा है और बरौनी प्रखंड के सिमरिया बिंद टोली में बड़ी संख्या में घर पानी में डूब गए हैं। सारण के दिघवारा क्षेत्र में माही नदी का बांध करीब 30 फीट तक टूटने की जानकारी सामने आई है, जिससे आसपास की पंचायतों और बड़ी आबादी पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। मुंगेर में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है और बढ़ते जलस्तर के कारण छह प्रखंड प्रभावित बताए जा रहे हैं। शहर के लाल दरवाजा इलाके में कई स्थानों पर सड़कों पर तीन से चार फीट तक पानी जमा हो गया है। खगड़िया में भी बाढ़ की स्थिति बिगड़ रही है और कई घर जलमग्न हो चुके हैं। परबत्ता प्रखंड के प्रभावित गांवों से लोग पानी से घिरे रास्तों को पार कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं, वहीं कई परिवार अपने मवेशियों को भी साथ लेकर निकलने को मजबूर हैं। छपरा में NH-19 पर पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है। भागलपुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में यहां गंगा का जलस्तर करीब 46 सेंटीमीटर बढ़ा है और नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुकी है। कहलगांव में भी गंगा लाल निशान से काफी ऊपर बह रही है। पटना में गंगा और पुनपुन दोनों खतरे के निशान से ऊपर हैं, हालांकि शहरी क्षेत्र में फिलहाल बड़े खतरे की स्थिति नहीं बताई गई है। इस बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। खगड़िया प्रशासन की ओर से माइकिंग के जरिए लोगों को नदी किनारे नहीं जाने की चेतावनी दी जा रही है, राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई की तैयारियां की जा रही हैं तथा बचाव कार्य के लिए नावों की संख्या बढ़ाई जा रही है। दूसरी ओर तिलकामांझी विश्वविद्यालय के गर्ल्स हॉस्टल में भी बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद छात्राओं को हॉस्टल खाली कर अपने घर लौटना पड़ा है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आने वाले दिनों में हालात पर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की निगरानी बनी हुई है।




