रोहिणी घावरी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं: अखिलेश या कांग्रेस नहीं, वाल्मीकि समाज को हिस्सेदारी देने वाले का समर्थन
स्विट्जरलैंड से भारत लौटीं रोहिणी घावरी ने 2027 चुनाव और वाल्मीकि समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी पर खुलकर रखी बात

लखनऊ। स्विट्जरलैंड में करीब छह साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद अब वह लखनऊ पहुंची हैं।
दैनिक भास्कर से बातचीत में रोहिणी ने आरक्षण में वर्गीकरण, क्रीमी लेयर, वाल्मीकि समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने अखिलेश यादव, मायावती और चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी खुलकर बात की।
रोहिणी का कहना है कि उनका व्यक्तिगत लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं है। वह अपने समाज के लोगों को चुनाव लड़ाकर विधानसभा और संसद तक पहुंचाना चाहती हैं।
‘5 साल में वाल्मीकि समाज का मुख्यमंत्री बनाना लक्ष्य’
रोहिणी ने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी वाल्मीकि समाज की अच्छी आबादी है।
उनके मुताबिक, देश के लगभग हर वर्ग को राजनीति में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है, लेकिन वाल्मीकि समाज को लंबे समय तक केवल सफाई के काम से जोड़कर देखा गया। अब समाज को राजनीतिक सत्ता में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
आरक्षण वर्गीकरण के पक्ष में रोहिणी
रोहिणी ने 1 अगस्त 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत आरक्षण के वर्गीकरण का समर्थन किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों में इसे लागू किया जा सकता है तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।
उनका आरोप है कि आरक्षण का लाभ कुछ जातियों तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी सीमित रह गया है। वह चाहती हैं कि आरक्षण का फायदा समाज के उन लोगों तक भी पहुंचे, जो आज भी बेहद कमजोर आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में रह रहे हैं।
क्रीमी लेयर लागू करने की भी वकालत
रोहिणी ने क्रीमी लेयर व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी मां, दादी और नानी सफाईकर्मी थीं। उन्हें आरक्षण का लाभ मिला, जिससे वह विदेश जाकर पढ़ाई कर सकीं और नौकरी कर पाईं।
उनका कहना है कि अब उनकी आने वाली पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि वह खुद शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर चुकी हैं।
‘भाजपा मांग मानेगी तो उसके साथ भी जाएंगे’
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर रोहिणी ने कहा कि उनका समर्थन किसी एक पार्टी के लिए पहले से तय नहीं है।
उनके मुताबिक, जो पार्टी वाल्मीकि समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी देगी और आरक्षण वर्गीकरण लागू करेगी, समाज उसके साथ जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर भाजपा उनकी मांगें मानती है तो उसके साथ जाने में भी कोई समस्या नहीं है। वहीं, अगर अखिलेश यादव आरक्षण वर्गीकरण लागू कराकर वाल्मीकि समाज को उचित राजनीतिक हिस्सेदारी देते हैं और उदाहरण के तौर पर 10 टिकट देते हैं, तो उन्हें भी समर्थन दिया जा सकता है।
‘मैं चुनाव लड़ने नहीं, अपने समाज को चुनाव लड़ाने आई हूं’
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 2027 में खुद चुनाव लड़ेंगी, तो रोहिणी ने कहा कि उनका लक्ष्य खुद विधायक या सांसद बनना नहीं है।
उन्होंने कहा कि सच्चा नेता वही है, जो नई लीडरशिप तैयार करे। उनके मुताबिक, खुद किसी पद पर बैठ जाना ही नेतृत्व नहीं है।
उनकी प्राथमिकता वाल्मीकि समाज के लोगों को टिकट दिलाना और उन्हें चुनाव जिताकर विधानसभा तक पहुंचाना है।
अखिलेश के PDA मॉडल की तारीफ
रोहिणी ने अखिलेश यादव के PDA मॉडल को लेकर सकारात्मक राय रखी। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में अखिलेश का काम सराहनीय रहा है।
उनके मुताबिक, अखिलेश दलितों, पिछड़ों, शोषितों और अल्पसंख्यकों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वह युवाओं और शिक्षा के मुद्दों पर भी बात कर रहे हैं।
रोहिणी ने कहा कि उत्तर प्रदेश बदलाव चाहता है और अखिलेश यादव को एक मौका दिया जाना चाहिए।
अखिलेश से मुलाकात की संभावना
रोहिणी ने बताया कि स्विट्जरलैंड में रहने के दौरान भी उनकी अखिलेश यादव से बातचीत हुई थी। उनके मुताबिक, अखिलेश ने उनसे कहा था कि जब लखनऊ आएं तो मुलाकात करें।
उन्होंने कहा कि वह अखिलेश से मिलकर वाल्मीकि समाज की मांगें और अधिकार उनके सामने रखेंगी।
मायावती को बताया अपना आदर्श
मायावती से सीधे बातचीत या मुलाकात के सवाल पर रोहिणी ने कहा कि उनकी सीधे बहनजी से बात नहीं हुई है, लेकिन उनके करीबी लोगों से संपर्क रहा है।
उन्होंने कहा कि मायावती उनके लिए हमेशा आदर्श रहेंगी।
बसपा, PDA और चंद्रशेखर के मॉडल पर क्या बोलीं?
रोहिणी ने दलित राजनीति के तीन प्रमुख राजनीतिक विकल्पों पर अपनी राय भी रखी।
उन्होंने कहा कि जब बसपा का उदय हुआ था, तब उसका मॉडल लोगों को पसंद आया और बड़ी संख्या में लोग उससे जुड़े। इसी राजनीतिक आधार के कारण मायावती चार बार मुख्यमंत्री बनीं।
उन्होंने PDA को अपेक्षाकृत नया मॉडल बताया और कहा कि अखिलेश पहले से राजनीति में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जाटव समाज का एक हिस्सा भी अब सपा को विकल्प के रूप में देख रहा है और वाल्मीकि समाज के कुछ लोग भी उससे जुड़ रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद के मॉडल को लेकर रोहिणी ने अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि वह इसे सामाजिक कल्याण का मॉडल नहीं मानतीं और आरोप लगाया कि इसमें एक व्यक्ति को स्थापित करने पर ज्यादा जोर दिखाई देता है।
चंद्रशेखर से अलग होने पर बोलीं- कोर्ट में सभी साक्ष्य दिए
चंद्रशेखर आजाद से अपने विवाद को लेकर रोहिणी ने कहा कि उन्होंने उनके खिलाफ सभी साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं और वह कोर्ट में अपनी बात मजबूती से रख रही हैं।
उन्होंने चंद्रशेखर की ताकत बताते हुए कहा कि वह अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करने में सक्षम हैं। वहीं, उनकी कमजोरी के तौर पर रोहिणी ने उनके पास स्पष्ट विजन, नीति या ब्लूप्रिंट नहीं होने का आरोप लगाया।
ये रोहिणी के आरोप और राजनीतिक आकलन हैं; इन पर चंद्रशेखर आजाद का पक्ष इस इंटरव्यू में उपलब्ध नहीं है।
बाराबंकी में नारेबाजी पर भी प्रतिक्रिया
बाराबंकी में चंद्रशेखर के कार्यक्रम के दौरान अपने समर्थन में कथित नारेबाजी को लेकर रोहिणी ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी देर रात मिली थी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि नारे लगाने वाले लोग कौन थे और पुलिस ने भी ऐसी किसी घटना से इनकार किया है।
उन्होंने कहा कि जो भी गलत करेगा, उसे उसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।
‘Gen-Z जाति-धर्म से ऊपर उठकर सोच रही’
युवाओं को लेकर रोहिणी ने कहा कि आज की Gen-Z पीढ़ी जाति और धर्म के भेदभाव से आगे निकलकर शिक्षा, रोजगार और समानता जैसे मुद्दों पर बात कर रही है।
उनका मानना है कि राजनीतिक दलों को युवाओं की इन जरूरतों को समझना होगा।
शादी को लेकर बोलीं- अब व्यक्तिगत जीवन त्याग दिया
अपने निजी जीवन को लेकर पूछे गए सवाल पर रोहिणी ने कहा कि उन्होंने शादी नहीं करने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि उनकी उम्र 33 साल है और पिछले कुछ साल उनके लिए बेहद कठिन रहे। उन्होंने कहा कि कभी उन्होंने भी शादी और परिवार के सपने देखे थे, लेकिन अब उन्होंने अपना व्यक्तिगत जीवन समाज के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है।
रोहिणी ने कहा कि वह बाबासाहेब आंबेडकर, कांशीराम और मायावती के विचारों से प्रेरणा लेकर वाल्मीकि और बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहती हैं।




