राजस्थान निकाय चुनाव में अजब-गजब घटनाक्रम, निर्दलीय प्रत्याशी के ऑफिस के सामने छोड़े कुत्ते; वोटर लिस्ट में हनुमानजी की फोटो
डूंगरपुर में भाजपा के बागी प्रत्याशी ने लगाया सत्ता के दुरुपयोग का आरोप, कोटा में मतदाता की जानकारी सही लेकिन फोटो की जगह लगी हनुमानजी की तस्वीर; जयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी के प्रचार में पहुंचे विधायक की गाड़ी का लोगों ने किया घेराव

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का प्रचार जोर पकड़ने के साथ ही अलग-अलग शहरों से ऐसे घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जो चुनावी माहौल को चर्चा में ला रहे हैं। डूंगरपुर, कोटा और जयपुर में सामने आई घटनाओं ने जहां चुनावी राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं मतदाता सूची से जुड़ी एक अजीब गलती भी सामने आई है। डूंगरपुर के वार्ड नंबर 31 स्थित न्यू कॉलोनी में भाजपा के बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे सुनील जैन के चुनाव कार्यालय के सामने नगर परिषद के शेल्टर होम की गाड़ी से करीब 10 से 15 कुत्ते छोड़े जाने का मामला सामने आया है। घटना 4 सितंबर की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन आरोप है कि गाड़ी चालक कुत्तों को वहां छोड़कर मौके से चला गया। निर्दलीय प्रत्याशी सुनील जैन ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव और सत्ता के कथित दुरुपयोग से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव में कमजोर करने की नीयत से ऐसा किया गया है। हालांकि इस मामले में नगर परिषद की ओर से कार्रवाई के पीछे क्या वजह थी, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है, इसलिए प्रत्याशी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर कोटा नगर निगम के वार्ड नंबर 29 की मतदाता सूची में एक ऐसी गड़बड़ी सामने आई, जिसने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। भाग संख्या 12 में एक मतदाता का नाम, पिता का नाम, मकान नंबर और अन्य विवरण सही दर्ज हैं, लेकिन जहां मतदाता की तस्वीर होनी चाहिए थी, वहां भगवान हनुमानजी की तस्वीर लगी हुई है। मतदाता सूची में इस तरह की तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा होने लगी और चुनावी प्रक्रिया में डेटा वेरिफिकेशन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे। मतदाता सूची में फोटो की गलत एंट्री जैसी गलती चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पहचान संबंधी विवरण मतदान प्रक्रिया का अहम हिस्सा होते हैं। अब इस तरह की त्रुटि को दुरुस्त करने के लिए संबंधित प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी। वहीं जयपुर में आमेर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 149 में चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय विरोध का मामला सामने आया। कांग्रेस प्रत्याशी अंजलि ब्रह्मभट्ट के समर्थन में प्रचार के लिए पहुंचे आमेर विधायक प्रशांत सहदेव शर्मा की गाड़ी को हांडीपुरा क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने घेर लिया और विरोध जताते हुए काले झंडे दिखाए। मौके पर मौजूद लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद क्षेत्र का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण नजर आया। निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दे अक्सर बड़े राजनीतिक मुद्दों पर भारी पड़ते हैं और प्रत्याशियों को वार्ड स्तर की समस्याओं को लेकर मतदाताओं के सवालों का सामना करना पड़ता है। इसी चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी भाजपा के प्रचार अभियान में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। अजमेर में रोड शो के दौरान उन्होंने युवाओं को रोजगार देने के सरकार के दावे दोहराते हुए कहा कि राज्य में चार लाख युवाओं को सरकारी और छह लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से अब तक करीब 1.89 लाख युवाओं को सरकारी रोजगार और साढ़े चार लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार मिलने का दावा भी किया। मुख्यमंत्री का अजमेर के बाद बीकानेर में भी रोड शो प्रस्तावित था, जहां भाजपा ने निकाय चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। दूसरी ओर अलवर नगर निगम चुनाव में मेयर का पद इस बार महिला के लिए आरक्षित होने के कारण राजनीतिक दलों ने बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। उपलब्ध चुनावी जानकारी के अनुसार भाजपा और कांग्रेस की ओर से उतारी गई 56 महिला प्रत्याशियों में किसी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है, जबकि निर्दलीय महिला उम्मीदवारों में भी किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई है। इससे चुनावी मैदान में महिला प्रत्याशियों की छवि को लेकर एक अलग चर्चा शुरू हुई है। उदयपुर में भाजपा के बाद कांग्रेस भी नगर निगम चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी करने की तैयारी में है, जिसमें स्मार्ट सिटी, प्रत्येक वार्ड में मूलभूत सुविधाओं और शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। इस तरह राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में एक तरफ बड़े नेता रोड शो और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं को साध रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वार्ड स्तर पर प्रत्याशियों को स्थानीय विरोध, प्रशासनिक विवाद, मतदाता सूची की गड़बड़ियों और अनोखे घटनाक्रमों का सामना करना पड़ रहा है। डूंगरपुर में निर्दलीय प्रत्याशी के कार्यालय के सामने कुत्ते छोड़े जाने का आरोप, कोटा में मतदाता की जगह धार्मिक तस्वीर दर्ज होने की गलती और जयपुर में विधायक की गाड़ी का घेराव जैसे मामले यह संकेत दे रहे हैं कि चुनावी लड़ाई अब केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों और वार्ड स्तर की नाराजगी के आधार पर भी आकार ले रही है। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान तेज होने के साथ ऐसे और स्थानीय घटनाक्रम सामने आने की संभावना है, जिनका सीधा असर प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति और मतदाताओं के मूड पर पड़ सकता है।




