एमपी में नरोत्तम मिश्रा से नेताओं की मुलाकातें चर्चा में: 11 दिन में 7 बड़े नेता पहुंचे, बोले- ‘कैप्टन जहां खड़ा करेगा, वहीं फील्डिंग करूंगा
पद और विधानसभा सदस्यता न होने के बावजूद 11 दिन में 7 बड़े नेताओं ने की मुलाकात; नरोत्तम बोले- पार्टी जहां जिम्मेदारी देगी, वहीं पूरी ईमानदारी से फील्डिंग करूंगा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। विधानसभा सदस्य नहीं होने और सरकार में कोई पद नहीं होने के बावजूद पिछले 11 दिनों में भाजपा के 7 बड़े नेताओं ने उनसे मुलाकात की है। इनमें मंत्री, विधायक, संगठन पदाधिकारी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल हैं।
इन मुलाकातों ने नरोत्तम मिश्रा की आगामी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। हालांकि, खुद नरोत्तम मिश्रा इन मुलाकातों को सामान्य और दोस्ताना बताते हैं। उनका कहना है कि पार्टी में लंबे समय तक काम करने के कारण कई नेताओं से उनके व्यक्तिगत और मित्रवत संबंध हैं।
‘कैप्टन जहां खड़ा करेगा, वहीं फील्डिंग करूंगा’
अपनी भविष्य की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि वह खुद को भाजपा का कार्यकर्ता मानते हैं।
उन्होंने कहा कि टीम का कप्तान जहां फील्डिंग में लगाएगा—चाहे मिड विकेट पर, बाउंड्री पर, गेंदबाजी में या विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी दे—वह अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
नरोत्तम के मुताबिक, उनकी भूमिका वह खुद तय नहीं करते। पार्टी जिस जिम्मेदारी के लिए उन्हें उचित समझेगी, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।
मोहन सरकार की भी की तारीफ
नेताओं से मुलाकातों के बीच नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार की तारीफ भी की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र पर काम कर रहे हैं और लगातार मैदान में जाकर लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री का इस तरह ग्राउंड पर जाना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।
प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि लॉ एंड ऑर्डर मुख्यमंत्री के पास है और प्रदेश में स्थिति ठीक है।
2023 में चुनाव हारने के बाद बदली राजनीतिक भूमिका
नरोत्तम मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद उनकी सक्रिय राजनीति की भूमिका में बदलाव आया।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें भाजपा की ‘न्यू जॉइनिंग टोली’ का प्रदेश संयोजक बनाया गया था। नरोत्तम मिश्रा के दावे के अनुसार, उनके नेतृत्व में 2.58 लाख से ज्यादा लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली, जिनमें बड़ी संख्या कांग्रेस से जुड़े लोगों की थी।
इसके बाद 2024 में राज्यसभा के लिए भी उनके नाम की चर्चा हुई, लेकिन पार्टी ने दूसरे नेताओं को मौका दिया।
प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में भी रहा नाम
2025 में भाजपा के मध्य प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए जिन नेताओं के नाम चर्चा में थे, उनमें नरोत्तम मिश्रा का नाम भी शामिल था। हालांकि, अंत में उन्हें यह जिम्मेदारी नहीं मिली।
इसके बाद 2026 में दतिया उपचुनाव में भी उन्हें टिकट नहीं मिला। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गए। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य और अगली भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हुईं।
11 दिन में 7 नेताओं से मुलाकात क्यों चर्चा में?
हाल के दिनों में भाजपा के कई बड़े नेताओं की नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन मुलाकातों को लेकर नरोत्तम मिश्रा ने किसी तरह के राजनीतिक समीकरण या नई जिम्मेदारी की पुष्टि नहीं की है।
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक गिरिजाशंकर के मुताबिक, भाजपा में फिलहाल किसी बड़ी राजनीतिक उठापटक की संभावना नजर नहीं आती। उनका मानना है कि पार्टी के बड़े फैसले हाईकमान के स्तर पर होते हैं और संगठनात्मक अनुशासन के कारण नेताओं के बीच सार्वजनिक तौर पर गुटबाजी या बयानबाजी की गुंजाइश कम है।
यूपी चुनाव से भी जोड़कर देखी जा रही मुलाकातें
राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग इन मुलाकातों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और भाजपा के सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देख रहा है।
उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं की राजनीतिक भूमिका को देखते हुए भाजपा की रणनीति में इस वर्ग को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से नरोत्तम मिश्रा जैसे नेताओं की सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं।
हालांकि, फिलहाल पार्टी की ओर से नरोत्तम मिश्रा को लेकर किसी नई जिम्मेदारी या बड़े राजनीतिक बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में नेताओं की मुलाकातों को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।




