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ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीरों पर विवाद: छात्र ने फोटो फाड़ी, जवाब में जमात के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगाई

Dhaka University Jinnah Photo Row: जिन्ना की तस्वीर पर बवाल, छात्र ने फाड़ी फोटो

ढाका। बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी के सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के नए आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं।

छात्रों के एक वर्ग ने इसका विरोध किया। सोमवार को उर्दू विभाग के छात्र मोहम्मद अबू तैयब ने इनमें से एक तस्वीर फ्रेम से निकालकर फाड़ दी। इसके बाद छात्र फेडरेशन के नेता अरको बरुआ ने विरोध के तौर पर उसी स्थान पर जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगा दी।

इस घटनाक्रम के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में विवाद और बढ़ गया।

DUCSU बोला- तस्वीरें सम्मान के लिए नहीं लगाई गईं

DUCSU के नए आर्काइव का उद्घाटन रविवार को किया गया था। इसमें 1905 से 1971 तक ढाका यूनिवर्सिटी के इतिहास से संबंधित दस्तावेज और तस्वीरें रखी गई हैं।

आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें शामिल थीं। इनमें:

1948 की तस्वीर, जिसमें जिन्ना ढाका के तत्कालीन रेसकोर्स ग्राउंड में उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राज्य भाषा बनाने की बात कर रहे थे।
1940 के ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन की तस्वीर।
1970 के चुनाव से संबंधित ‘डॉन’ अखबार की कटिंग।

DUCSU सचिव फातिमा तसनीम जुमा ने कहा कि इन तस्वीरों को जिन्ना के सम्मान में नहीं लगाया गया था। उनका कहना था कि आर्काइव का उद्देश्य इतिहास की प्रमुख घटनाओं और उनसे जुड़े लोगों को प्रदर्शित करना है।

DUCSU के GS एसएम फरहाद ने भी कहा कि उर्दू से संबंधित जिन्ना की तस्वीर उनके समर्थन के लिए नहीं, बल्कि उस दौर के भाषा विवाद और उसके विरोध को समझाने के लिए रखी गई थी।

छात्रों ने पूछा- मुजीबुर रहमान की तस्वीर क्यों नहीं?

तस्वीरें सामने आने के बाद कुछ छात्र संगठनों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि ढाका यूनिवर्सिटी का इतिहास भाषा आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम से गहराई से जुड़ा है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सवाल उठाया कि अगर आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरों को जगह दी गई है, तो बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की कोई प्रमुख तस्वीर क्यों नहीं है?

सोमवार को इसी मुद्दे को लेकर विरोध और तेज हो गया।

छात्र ने जिन्ना की तस्वीर फाड़ दी

सोमवार दोपहर करीब 2 बजे ढाका यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के छात्र मोहम्मद अबू तैयब आर्काइव पहुंचे। वह पिछले DUCSU चुनाव में उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार भी रह चुके हैं।

तैयब ने आर्काइव में लगी जिन्ना की एक तस्वीर फ्रेम से निकालकर फाड़ दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस यूनिवर्सिटी का इतिहास भाषा आंदोलन और 1971 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है, वहां जिन्ना की तस्वीर क्यों लगाई गई।

उन्होंने DUCSU के घोषणापत्र का हवाला देते हुए भी सवाल उठाया कि क्या उसमें जिन्ना को नायक के रूप में पेश करने की बात कही गई थी।

इसके बाद छात्र फेडरेशन की DU इकाई की ओर से जिन्ना से जुड़ी ‘डॉन’ अखबार की कटिंग भी उन्हें दी गई, जिसे तैयब ने फाड़ दिया।

जवाब में गुलाम आजम की तस्वीर लगाई

तैयब की कार्रवाई के बाद छात्र फेडरेशन के नेता अरको बरुआ ने इसका समर्थन किया।

कुछ देर बाद बरुआ ने उसी आर्काइव में गुलाम आजम की तस्वीर लगा दी। उनका कहना था कि यदि DUCSU सचिव अपनी पसंद से जिन्ना की तस्वीर प्रदर्शित कर सकती हैं, तो छात्र भी विरोध के तौर पर अपनी पसंद की तस्वीर लगा सकते हैं।

गुलाम आजम जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख थे। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उन पर पाकिस्तान समर्थक बलों का समर्थन और नेतृत्व करने के आरोप लगे थे।

2013 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराया था और 90 साल की सजा सुनाई थी। 23 अक्टूबर 2014 को जेल में उनकी मौत हो गई।

बरुआ ने तस्वीर के साथ 1 जनवरी 1981 की एक घटना का कैप्शन भी लगाया, जिसमें बैतुल मुकर्रम के बाहर भीड़ द्वारा गुलाम आजम की पिटाई का उल्लेख था।

DUCSU चुनाव में जमात समर्थित छात्र संगठन की बड़ी जीत

इस विवाद के पीछे ढाका यूनिवर्सिटी की बदली छात्र राजनीति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सितंबर 2025 में हुए DUCSU चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई इस्लामी छात्र शिबिर के समर्थन वाले उम्मीदवारों ने प्रमुख पदों पर जीत हासिल की थी। उनके उम्मीदवार VP, GS और AGS जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चुने गए।

यह अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद DUCSU का पहला चुनाव था। उस चुनाव में अवामी लीग की छात्र इकाई छात्र लीग ने हिस्सा नहीं लिया था।

चुनाव के बाद DUCSU में शिबिर समर्थित नेताओं की मौजूदगी बढ़ी और यूनिवर्सिटी के इतिहास तथा कैंपस की राजनीतिक पहचान को लेकर बहस भी तेज हुई।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने DUCSU को चेतावनी दी

जिन्ना की तस्वीरों को लेकर विवाद के बीच ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने DUCSU के हालिया कुछ फैसलों पर भी आपत्ति जताई।

यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशंस ऑफिस के मुताबिक, DUCSU ने कुछ मामलों में यूनिवर्सिटी के कानून और नियमों का पालन नहीं किया है।

वाइस चांसलर डॉ. एबीएम ओबैदुल इस्लाम ने कहा कि DUCSU ने यूनिवर्सिटी के कानून के खिलाफ काम किया है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने चेतावनी दी कि यदि DUCSU प्रशासन को दरकिनार कर कोई समानांतर व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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