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मध्य प्रदेश

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ से पहले MP में सियासी बयानबाजी तेज: उमा भारती ने राहुल को ‘बुड्ढा’ कहा, शिवराज ने ‘नाराज फूफा’ बताया

राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से पहले भाजपा नेताओं के तीखे बयान, उमा भारती ने ‘बुड्ढा-डोकरा’ कहा तो शिवराज ने ‘नाराज फूफा’ बताया

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों और सियासी घटनाक्रम का दौर चल रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। कार्यक्रम से पहले ही भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने राहुल गांधी को ‘बुड्ढा’ और ‘डोकरा’ कहकर तंज कसा, जबकि केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें ‘नाराज फूफा’ बताया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला।

उमा भारती बोलीं- राहुल गांधी अब बुड्ढे हो गए

राहुल गांधी के इंदौर दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए उमा भारती ने नेपाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल में युवाओं ने सत्ता परिवर्तन किया, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर 76 साल की सुशीला को चुना गया।

उमा भारती ने कहा कि भारत में युवा नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानते हैं। उनके मुताबिक राहुल गांधी खुद 50 साल से ज्यादा उम्र के हो चुके हैं और अब युवाओं का प्रतिनिधित्व करने की स्थिति में नहीं हैं।

उन्होंने राहुल गांधी के लिए ‘बुड्ढा’ और ‘डोकरा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

शिवराज ने कहा- ‘नाराज फूफा’

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘नाराज फूफा’ बताया।

उन्होंने कहा कि नाराज फूफाओं की बात ही अलग होती है और उन्हें हर जगह नाराज होने की कोई न कोई वजह मिल जाती है।

CM मोहन यादव बोले- ‘झूठ की गूंज’ लेकर आ रहे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए इसे ‘झूठ की गूंज’ बताया।

उन्होंने राहुल गांधी के परिवार और उनके राजनीतिक इतिहास पर भी तीखी टिप्पणी की। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को लेकर ‘पप्पू’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को गैर-राजनीतिक कार्यक्रम बता रहे हैं। हालांकि राहुल गांधी स्वयं एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं, इसलिए कार्यक्रम को लेकर भाजपा नेताओं की बयानबाजी भी शुरू हो गई है।

अब नजर इस बात पर है कि राहुल गांधी इंदौर में भाजपा के इन हमलों का राजनीतिक जवाब देते हैं या कार्यक्रम को युवाओं से जुड़े गैर-राजनीतिक मुद्दों तक सीमित रखते हैं।

उमा भारती के घर पहुंचे CM मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से मिलने उनके भोपाल स्थित आवास पहुंचे। इस दौरान जब मीडिया ने मुख्यमंत्री से सवाल करने की कोशिश की तो उमा भारती ने पत्रकारों को रोक दिया।

उन्होंने कहा कि यह उनका घर है और यहां मुख्यमंत्री से सवाल-जवाब नहीं होंगे। इसके बाद उन्होंने मीडिया के माइक अपनी ओर करवा लिए और पत्रकारों से खुद बात की।

इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव मुस्कुराते नजर आए।

करीब 40 मिनट बंद कमरे में हुई बातचीत

मुख्यमंत्री और उमा भारती के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी उमा भारती ने सार्वजनिक नहीं की।

उन्होंने इसे ‘भाई-बहन की मुलाकात’ बताया।

उमा भारती ने बताया कि वह खुद मुख्यमंत्री से मिलने जाने वाली थीं, लेकिन मोहन यादव ने उनसे कहा कि वे स्वयं उनके घर मिलने आएंगे।

बिजली गई तो मोबाइल टॉर्च में पढ़ा कागज

खंडवा में भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी चर्चा में रही। सांसद यहां भाजपा के ‘सेवा संकल्प अभियान’ की जानकारी देने पहुंचे थे।

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। भाजपा की ओर से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक एक महीने का ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। इसी अभियान की जानकारी देने के लिए सांसद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे।

सांसद पार्टी की ओर से मिले लंबे-चौड़े कागज को पढ़कर कार्यक्रम की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई।

इसके बाद मोबाइल की टॉर्च जलाई गई और सांसद ने मोबाइल की रोशनी में ही कागज पढ़कर प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी रखी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अभियान से ज्यादा बिजली जाने को लेकर चर्चा में आ गई।

अब ‘अंदर की बात’ भी जानिए
बड़े जिले की चाहत? शिशु मंदिरों की गतिविधियों में बढ़ी दिलचस्पी

भोपाल संभाग के एक जिले के कलेक्टर को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इन दिनों चर्चाएं चल रही हैं। दावा किया जा रहा है कि सरकारी कामकाज के अलावा जिले में संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों की गतिविधियों में उनकी दिलचस्पी बढ़ी है।

बताया जा रहा है कि स्कूलों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी कलेक्टर तक पहुंचने पर उनके समाधान में भी उनकी सक्रियता दिखाई देती है। यह भी चर्चा है कि इन स्कूलों के लिए कारोबारियों और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से सहयोग जुटाने तथा स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाने में भी उनकी रुचि है।

हालांकि, कलेक्टर की ओर से ऐसी किसी राजनीतिक मंशा की पुष्टि नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अटकलें हैं कि कलेक्टर की नजर भविष्य में प्रदेश के किसी बड़े जिले में फील्ड पोस्टिंग पर है। इसी वजह से संघ से जुड़े संगठनों के साथ बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश की जा रही है, ऐसी चर्चाएं हैं।

नोट: यह हिस्सा राजनीतिक/प्रशासनिक हलकों में चल रही चर्चाओं और दावों पर आधारित है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है।

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