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प्रियांक खड़गे बोले- BJP नेता बिना टेलीप्रॉम्प्टर वंदे मातरम गाकर दिखाएं: ऐसा किया तो मैं इस्तीफा दे दूंगा; कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों में पहले 2 अंतरे का आदेश

कर्नाटक के गृह मंत्री ने BJP नेताओं बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को दी चुनौती; बोले- बिना टेलीप्रॉम्प्टर या कागज देखे पूरा वंदे मातरम गा दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा

कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा नेताओं बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता बिना टेलीप्रॉम्प्टर या कागज देखे वंदे मातरम के सभी अंतरे गाकर दिखाएं। खड़गे ने कहा कि अगर वे ऐसा कर देते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे।

यह विवाद कर्नाटक सरकार के उस आदेश के बाद तेज हुआ है, जिसमें राज्य के सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाने का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है।

केंद्र के निर्देश में पूरे आधिकारिक संस्करण का उल्लेख

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण और विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय के दस्तावेज में वंदे मातरम का आधिकारिक संस्करण छह अंतरों वाला दिया गया है।

जनवरी 2026 में केंद्र के निर्देश के अनुसार, जब किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान रखने की व्यवस्था बताई गई थी।

कर्नाटक सरकार ने 8 सितंबर को जारी किया था आदेश

कर्नाटक सरकार के 8 सितंबर के आदेश के अनुसार, राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का गायन या वादन किया जाना है। सामान्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए शुरुआती दो अंतरों का प्रावधान किया गया है, जबकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह अपवाद लागू है।

राज्य सरकार ने अपने आदेश में सरकारी कार्यक्रमों में एकरूपता, सम्मान और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखने को निर्णय का आधार बताया है।

कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव का भी दिया हवाला

कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त 2026 को अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाने के 1937 के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था। प्रियांक खड़गे ने भी कर्नाटक सरकार के फैसले का बचाव करते हुए ऐतिहासिक नेताओं के फैसलों का हवाला दिया है।

दूसरी ओर, भाजपा ने कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और पूरे वंदे मातरम के गायन की मांग की है। यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस के साथ कानूनी विवाद में भी पहुंच गया है।

कर्नाटक हाईकोर्ट में PIL दाखिल

15 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर राज्य सरकार के दो अंतरे गाने संबंधी आदेश को चुनौती दी गई। याचिका में दावा किया गया है कि यह आदेश केंद्र सरकार के वंदे मातरम से जुड़े दिशा-निर्देशों के विपरीत है। मामले में हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई की मांग की गई है।

फिलहाल इस मामले में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है और अदालत में राज्य सरकार के आदेश की वैधता को लेकर चुनौती दी गई है।

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