13 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दो दोषियों को उम्रकैद: CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने खारिज की, 7 साल बाद आया फैसला
मनुआभान टेकरी पर 13 साल की नित्या की मौत के मामले में अविनाश साहू और जस्टिन राज दोषी करार; CBI की क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट ने खारिज की, जून 2026 में दोनों को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा

भोपाल। 30 अप्रैल 2019 को भोपाल की मनुआभान टेकरी घूमने गई 13 साल की नित्या अचानक लापता हो गई थी। रातभर तलाश के बाद उसका शव करीब 100 फीट गहरी खाई में मिला। पोस्टमार्टम में सिर पर गंभीर चोट के साथ यौन हिंसा के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई।
पुलिस की जांच अविनाश साहू और जस्टिन राज तक पहुंची। दोनों को गिरफ्तार किया गया। बाद में परिवार ने पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए CBI जांच की मांग की। मध्य प्रदेश सरकार ने CBI जांच के लिए पत्र लिखा।
CBI ने अपनी जांच में दोनों युवकों को आरोपी बनाए जाने के पर्याप्त आधार नहीं पाए और क्लोजर रिपोर्ट पेश की। हालांकि भोपाल की अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट और कार्रवाई समाप्त करने के आवेदन को स्वीकार नहीं किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही।
बुआ की गवाही से जुड़ीं घटनाक्रम की कड़ियां
मामले की सुनवाई के दौरान नित्या की बुआ की गवाही महत्वपूर्ण रही। बुआ ने अदालत को बताया कि उसने अविनाश के साथ मनुआभान टेकरी जाने की योजना पहले बनाई थी। 30 अप्रैल को नित्या उसके घर आई और उनके साथ जाने के लिए तैयार हो गई।
बुआ के मुताबिक, उसने अविनाश को फोन किया और तीनों एक्टिवा से टेकरी पहुंचे। रास्ते में अविनाश ने जस्टिन को भी बताया कि वे टेकरी जा रहे हैं।
करीब शाम 4:30 बजे तीनों टेकरी पहुंचे। मंदिर के पीछे की ओर जाने के बाद बुआ और नित्या गुफा में लिखे नाम पढ़ रहे थे, जबकि अविनाश मोबाइल चला रहा था।
कुछ समय बाद बुआ आगे पहाड़ी की ओर चली गई। जब अविनाश वापस नहीं आया तो उसने फोन किया, लेकिन मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर था।
बुआ के मुताबिक, कुछ देर बाद अविनाश हांफता और पसीने से तर होकर ऊपर आया और उसने बताया कि नित्या नहीं मिल रही है। इसके बाद बुआ, अविनाश और जस्टिन ने नित्या की तलाश शुरू की।
बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया था गलत
अविनाश की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका भी दायर की गई थी। बचाव पक्ष ने दावा किया था कि उसे झूठा फंसाया गया है। यह भी तर्क दिया गया कि शुरुआत में FIR अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई थी और बाद में अविनाश को आरोपी बनाया गया।
बचाव पक्ष ने DNA रिपोर्ट में विरोधाभास का हवाला दिया और कहा कि अविनाश की रिपोर्ट निगेटिव थी। जस्टिन राज को पहले जमानत मिलने का तर्क भी रखा गया।
हालांकि कोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज फॉरेंसिक साक्ष्यों में DNA मिलान का उल्लेख किया गया।
DNA साक्ष्य को कोर्ट ने माना महत्वपूर्ण
उपलब्ध कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, बच्ची की वैजाइनल स्वैब स्लाइड और प्यूबिक हेयर से मिले ऑटोसोमल STR DNA प्रोफाइल तथा अविनाश के बाएं हाथ के नाखूनों की स्क्रैपिंग से मिले DNA प्रोफाइल के बीच समानता पाई गई।
इसके अलावा अविनाश के ब्लड सैंपल से प्राप्त DNA का बच्ची के दोनों हाथों के नाखूनों की स्क्रैपिंग से मिले DNA से मैच होने की बात भी रिकॉर्ड में दर्ज है।
इस फॉरेंसिक साक्ष्य को अभियोजन के मामले में महत्वपूर्ण माना गया।
CBI ने LVA टेस्ट भी कराया
CBI ने दोनों आरोपियों और नित्या की बुआ का लेयर्ड वॉयस एनालिसिस (LVA) टेस्ट कराया था। इसका उद्देश्य पूछताछ के दौरान दिए गए जवाबों में कथित रूप से सच या झूठ के संकेतों का आकलन करना था।
2025 में CBI ने सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के मुताबिक, अविनाश की प्रतिक्रियाएं उसके बयानों से मेल खाती थीं। जस्टिन के संबंध में कुछ बातें छिपाने के संकेत बताए गए, जबकि बुआ के बारे में घटनाक्रम को लेकर अपराधबोध का उल्लेख किया गया।
हालांकि अदालत ने LVA और पॉलीग्राफ जैसे परीक्षणों के निष्कर्षों को मामले में निर्णायक साक्ष्य नहीं माना।
अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की
मामले में एक ओर CBI की जांच और क्लोजर रिपोर्ट थी, जबकि दूसरी ओर अभियोजन की ओर से मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्य पेश किए गए।
भोपाल कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट और कार्रवाई समाप्त करने के आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद अविनाश साहू और जस्टिन राज के खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ी।
सात साल बाद दोनों को दोषी ठहराया गया
जून 2026 में भोपाल जिला अदालत ने अविनाश साहू और जस्टिन राज को दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
अदालत ने दोनों को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट ने CBI की ओर से पेश LVA/पॉलीग्राफ संबंधी निष्कर्षों को निर्णायक नहीं माना। अदालत के अनुसार ये परीक्षण घटना के करीब चार साल बाद किए गए थे, इसलिए इनके आधार पर आरोपियों के जवाबों को निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और CBI की जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर भी अपने आदेश में विचार किया।
मामले की प्रमुख बातें
- घटना: 30 अप्रैल 2019
- स्थान: मनुआभान टेकरी, भोपाल
- पीड़िता: 13 वर्षीय नित्या
- आरोपी: अविनाश साहू और जस्टिन राज
- CBI जांच: दोनों आरोपियों के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई
- भोपाल कोर्ट: CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की
- महत्वपूर्ण साक्ष्य: गवाहों के बयान और फॉरेंसिक/DNA साक्ष्य
- फैसला: जून 2026
- सजा: दोनों दोषियों को मृत्यु तक आजीवन कारावास
नोट: यह रिपोर्ट आपके उपलब्ध स्रोत में दिए गए कोर्ट रिकॉर्ड, जांच और पक्षकारों की दलीलों के विवरण पर आधारित है। अदालत द्वारा दोषसिद्धि और सजा से संबंधित जानकारी को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
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