मध्यप्रदेश के 36 जिलों में सामान्य से कम बारिश: अल नीनो का असर, आधे प्रदेश में बारिश की कमी; जलाशयों में पिछले साल से 21% कम पानी
21 सितंबर तक 865.8 मिमी बारिश, सामान्य से 6% कम; अलीराजपुर में 49% कमी, भोपाल में 12% ज्यादा बारिश

भोपाल। मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 9 दिन बाकी हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। 21 सितंबर तक प्रदेश में 865.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 922.6 मिमी है। इस तरह प्रदेश में अब तक करीब 6% बारिश कम हुई है।
प्रदेश के 55 जिलों में से 36 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ है। इनमें 11 जिलों में बारिश की कमी 16 से 49% तक दर्ज की गई है।
अलीराजपुर में सबसे ज्यादा कमी
बारिश की सबसे ज्यादा कमी अलीराजपुर में 49% दर्ज की गई है। इसके बाद नर्मदापुरम में 34%, रतलाम में 33%, झाबुआ में 32% और हरदा में 31% कमी है।
कम बारिश वाले जिलों में पश्चिमी मध्यप्रदेश के जिलों की संख्या अधिक है। इंदौर में सामान्य से 24% और छिंदवाड़ा में 23% कम बारिश दर्ज हुई है। मौसम विभाग ने मानसून की इस स्थिति के पीछे अल नीनो के प्रभाव को वजह बताया है।
भोपाल में सामान्य से 12% ज्यादा बारिश
प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी के बीच भोपाल में स्थिति अलग है। यहां सामान्य तौर पर 928.2 मिमी बारिश होनी थी, जबकि 21 सितंबर तक 1063.3 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी भोपाल में सामान्य से 12% अधिक बारिश हुई है।
बड़े तालाब के फुल होने के बाद भदभदा और कलियासोत के गेट पांच-पांच बार खोले जा चुके हैं।
तीन दिन बाद नया सिस्टम, बारिश की उम्मीद
मौसम केंद्र के अनुसार करीब तीन दिन बाद एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इसे मानसून के अंतिम दौर के तौर पर देखा जा रहा है। इसके सक्रिय होने पर कमी वाले जिलों में बारिश की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस दौर में कितनी बारिश होगी, इसका असर सिस्टम की सक्रियता पर निर्भर करेगा।
जलाशयों में पिछले साल से 21% कम पानी
कम बारिश का असर प्रदेश के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार 178 प्रमुख जलाशयों में करीब 131.17 अरब क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है, जो पिछले साल की तुलना में 21% कम बताया गया है।
जल उपलब्धता में कमी का असर आगामी फसलों और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है।
खरीफ और रबी फसलों पर असर का अनुमान
अगस्त तक प्रदेश में खरीफ की बुवाई करीब 1.7% कम रही थी। रिपोर्ट में आईसीआरए के अनुमान का हवाला देते हुए बताया गया है कि खरीफ का रकबा करीब 2% तक घट सकता है।
कम बारिश, अधिक तापमान और अल नीनो के प्रभाव से मिट्टी की नमी कम होने की बात कही गई है। इससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है।
अक्टूबर से रबी फसलों की बुवाई शुरू होगी। शुरुआती सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण रहेगी। जल भंडार में कमी से गेहूं और चना जैसी रबी फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है असर
जलाशयों में पानी की कमी का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जल उपलब्धता घटने से हाइड्रो पावर का योगदान कम होने का जोखिम है। वहीं तापमान और सिंचाई की जरूरत के कारण बिजली की मांग बढ़ सकती है।




